विराट कोहली ने दिल्ली में कहा-क्रिकेट मेरा जीवन है, यह मैंने बचपन में ही तय कर लिया था

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Virat Kohli in Delhi DPS

दिल्ली के आरकेपुरम स्कूल में विराट कोहली

Virat Kohli: विराट कोहली ने काफी कम उम्र में यह तय कर लिया था कि वे अपना जीवन क्रिकेट को समर्पित करना चाहते हैं. अपने सपने को पूरा करने के लिए वे काफी ईमानदार थे और उन्होंने इसकी जानकारी अपने माता-पिता और टीचर्स को भी दे दी थी. डीपीएस स्कूल आरकेपुरम दिल्ली में विराट कोहली ने बच्चों से कहा कि अपने सपनों को लेकर ईमानदार रहें और उसे पूरा करने लिए प्रयास करें.

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Virat Kohli: आईपीएल के सोमवार के मुकाबले में आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) की टीम ने बहुत ही आसान मुकाबले में दिल्ली की टीम को 9 विकेट से हरा दिया. इस मुकाबले में दिल्ली ने इस आईपीएल सीजन का अबतक का न्यूनतम स्कोर 75 रन बनाया था. इस आसान मैच के बाद आरसीबी और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने मंगलवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने स्कूल के क्रिकेट एकेडमी के उद्घाटन समारोह में एक प्रेरणादायक संदेश दिया.

सपनों को पूरा करें

डीपीएस के कार्यक्रम में विराट कोहली ने स्टूडेंट्स से अपने सीखने के माहौल का सम्मान करने और पूरी ईमानदारी के साथ अपने सपनों को पूरा करने का आग्रह किया. इवेंट के दौरान स्टूडेंट्स से बात करते हुए, विराट कोहली ने कहा कि उन्हें स्कूल की गैदरिंग को संबोधित करने की आदत नहीं है. उन्होंने बताया कि मैं उस दौर से गुजरा हूं, जिस दौर में आज आप हैं, यही वजह है कि मैं आपसे गहराई से जुड़ पा रहा हूं. उन्होंने स्कूली के बच्चों को बताया कि कैसे क्रिकेट को अपने करियर के रास्ते के रूप में चुनने के बाद उनकी प्राथमिकताएं जल्दी बदल गईं. उन्होंने अपना फोकस बदल दिया. उन्होंने कहा कि मुझे बुलाने के लिए धन्यवाद.उन्होंने बच्चों को यह सीख दी कि अपने सपनों को जरूर पूरा करें और इसके लिए पूरी मेहनत करें और फोकस बनाकर रखें.

अपने शिक्षकों का सम्मान करें

स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए 37 साल के कोहली ने कहा कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहां आप सीखने आते हैं, आप आगे बढ़ते हैं, आप बेहतर इंसान बनते हैं. आपको बेहतर बनाने में टीचर्स की अहम भूमिका होती है, इसलिए उनका सम्मान करें. वे आपको गाइड करते हैं. कोहली ने बताया कि मैंने अपनी जिंदगी में बहुत पहले ही स्पोर्ट को चुना था, मुझे पूरा यकीन था कि मैं आगे बढ़कर क्रिकेट खेलना चाहता हूं. उन्होंने स्टूडेंट्स को सेल्फ-अवेयर रहने और अपने एम्बिशन के लिए पूरी तरह से कमिटेड रहने की सलाह दी.

कोहली ने कहा कि अपने सपनों के बारे में ईमानदार रहें, आप क्या करना चाहते हैं और उस सपने को पूरे कमिटमेंट के साथ फॉलो करें. सिर्फ आपको ही पता चलेगा कि आप 100% ईमानदार हैं या नहीं. कोहली ने बताया कि मैंने आठ साल की उम्र में प्रैक्टिस शुरू की थी और जब भी मुझे समय मिलता है, मैं अब भी अकादमी जाता रहता हूं. कोहली ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यहां क्रिकेट सीखने आने वाले सभी बच्चे इसकी वैल्यू कर सकते हैं. कोहली ने सभी बच्चों को क्रिकेट एकेडमी के लिए बधाई दी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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