मिथिलांचल में कायम है घर-घर तिलकुट खाने का रिवाज

Published at :24 Dec 2015 6:37 PM (IST)
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मिथिलांचल में कायम है घर-घर तिलकुट खाने का रिवाज

मिथिलांचल में कायम है घर-घर तिलकुट खाने का रिवाज तिलकुट की होने लगी खरीदारीबाजार में सजी है तिलकुट की दर्जनों दुकान प्रतिनिधि, सहरसा नगरसर्दी के ठिठुरन में गरमी का अहसास कराने के लिए बाजार में तिलकुट की दुकानें सज गयी है. गया व कोलकाता में बनने वाले मशहूर तिलकुट का स्वाद स्थानीय लोगों को चखाने […]

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मिथिलांचल में कायम है घर-घर तिलकुट खाने का रिवाज तिलकुट की होने लगी खरीदारीबाजार में सजी है तिलकुट की दर्जनों दुकान प्रतिनिधि, सहरसा नगरसर्दी के ठिठुरन में गरमी का अहसास कराने के लिए बाजार में तिलकुट की दुकानें सज गयी है. गया व कोलकाता में बनने वाले मशहूर तिलकुट का स्वाद स्थानीय लोगों को चखाने के लिये उक्त जगहों के ट्रेंड कारीगरों से तिलकुट का निर्माण कराया गया है. अन्य तिलकुटों की अपेक्षा खजूर, तिल पापरी, अनारकली व रामकटोरी तिलकुट ग्राहकों के बीच आकर्षण का केेंद्र बना है. परंपरा का हो रहा निर्वहन मिथिला क्षेत्र के प्रत्येक घरों में तिल सक्रांति के पूर्व से ही महिलाओं द्वारा घरों में तिल, चूडा व मुड़ही एवं शक्कर से लाय बनाये जाने की परंपरा रही है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लाई बनाने की उस परंपरा में जहां कमी आयी है, वहीं कद्रदानों की संख्या भी कम हो गयी है. जिसकी वजह से फैंसी तिलकुट का बाजार स्थानीय स्तर पर बढ़ने लगा है.खजूर तिलकुट के भी कद्रदानस्थानीय डीबी रोड, शंकर चौक एवं सब्जी मंडी स्थित लगे तिलकुट की दुकानों पर अनार कली व रामकटोरी के नाम को सुनना आम बात हो गयी है. ग्राहक व दुकानदार दोनों की पसंद खास्ता क्वालिटी में बनी तिलकुट का यही ब्रांड प्रसिद्ध हो गया है. शंकर चौक के तिलकुट विक्रेता प्रशांत कुमार बताते हैं कि इसके अलावा कोलकाता से आने वाले खजूर शक्कर तिलकुट के भी पसंद करने वालों की संख्या कम नही हैं. गया के कारीगर बना रहे तिलकुटबाजार में मिलने वाले तिलकुट स्थानीय स्तर पर गया व जमालपुर से आये कारीगरों द्वारा बनाया जा रहा है. सब्जी मंडी स्थित तिलकुट भंडार में आये कलाकार ने बताया कि स्थानीय व्यवसायी के बुलावे पर हमलोग हरेक साल आकर तिलकुट बनाते हैं. उन्होंने कहा कि तिलकुट बनाने में पवित्रता का ख्याल हमेशा रख जाता है. ताकि लोग बेहिचक इसे चढ़ा भी सके. राजा ने कहा कि तिल का अच्छी तरह भुंजकर चीनी का टोली बनाकर दोनों को मिलाया जाता है, फिर दोनों को कूटकर अलग-अलग आकार में बनाकर पैक किया जाता है. उन्होंने कहा कि उच्च कोटि के तिलकुट बनाने में कैसर, ईलाइची, खुआ, सौंफ का उपयोग किया जाता है. 200 से 300 रुपये किलो तक तिलकुटस्थानीय बाजार में तिलकुट के ग्राहकों की संख्या का पता इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ एक महीने की ही दुकानदारी में लगभग 50 लाख से अधिक के तिलकुट का बाजार पहुंच जाता है. उच्च क्वालिटी के तिलकुट 200 से 300 रुपये किलो तक बिक रहा है. फोटो- तिलकुट 27 – शंकर चौक पर सजी तिलकुट की दुकान

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