पर्यटन व कुटीर उद्योग को बढ़ावा दे, आय बढ़ाये सरकार

Published at :27 Nov 2015 6:37 PM (IST)
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पर्यटन व कुटीर उद्योग को बढ़ावा दे, आय बढ़ाये सरकार

पर्यटन व कुटीर उद्योग को बढ़ावा दे, आय बढ़ाये सरकार परिवहन व्यवस्था को भी है सुदृढ़ करने की जरूरतजिले की आमदनी बढ़ाने की है असीम संभावनाएंप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयनये वित्तीय वर्ष से बिहार को अल्कोहल फ्री स्टेट घोषित करने के निर्णय के बाद प्रदेश की आमदनी पर खासा असर पड़ने की बात कही जा रही है. […]

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पर्यटन व कुटीर उद्योग को बढ़ावा दे, आय बढ़ाये सरकार परिवहन व्यवस्था को भी है सुदृढ़ करने की जरूरतजिले की आमदनी बढ़ाने की है असीम संभावनाएंप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयनये वित्तीय वर्ष से बिहार को अल्कोहल फ्री स्टेट घोषित करने के निर्णय के बाद प्रदेश की आमदनी पर खासा असर पड़ने की बात कही जा रही है. कहा जा रहा है कि 4000 करोड़ रुपये की आय कम नहीं होती है. इस आय के एकाएक बंद हो जाने से राज्य की आर्थिक व्यवस्था चरमरा जायेगी. जिसका प्रतिकूल असर राज्य के विकास पर पड़ेगा. कई लोग तो यह भी कहने लगे हैं कि शराब से होने वाली आय को सरकार अब अन्य सामानों पर टैक्स लगाकर वसूलेगी. जबकि कई विद्वजनों, अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि ऐसा भ्रम फैलाया जा रहा है. प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार परिपक्व सोशल इंजीनियर हैं. वह जनता पर कभी भी अतिरिक्त भार नहीं पड़ने देंगे. यदि उन्होंने ऐसा निर्णय लिया है तो राज्य की आमदनी बढ़ाने के श्रोतों के विषय में भी गहनता से विचार किया होगा. पर्यटन क्षेत्र का हो विस्तारजिले में प्राचीन कालीन से लेकर आधुनिक पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं. जिसका विस्तार कर उसे मानचित्र पर लाने की आवश्यकता है. महिषी स्थित विश्व प्रसिद्ध उग्रतारा स्थान हो या विराटपुर का महाभारत कालीन चंडी स्थान. कंदाहा का सूर्य मंदिर हो या नवहट्टा का देवनवन मंदिर. देवना का बाबा वाणेश्वर स्थान हो या वनदेवी का मंदिर या फिर बनगांव का बाबाजी कुटी. महिषी का संत कारू खिरहरी स्थान हो या लहटा बथान. सिमरी बख्तियारपुर के काठो पंचायत स्थित बाबा मटेश्वरधाम हो या पतरघट के कहरा गांव स्थित मौनी बाबा की कुटी. सब अपने आप में अतिविशिष्ट हैं. सबों का महात्म्य महान है. इसका ज्ञान व जानकारी सबों तक पहुंचाने की जरूरत होगी. आध्यात्मिकता के साथ क्षेत्र की विशिष्टताओं का प्रसार होगा एवं राज्य की आमदनी बढ़ेगी. मत्स्यगंधा व कोसी महासेतु जिला मुख्यालय स्थित मत्स्यगंधा जलाशय प्रमुख पर्यटन स्थल में शामिल है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रशासनिक एवं सरकारी उपेक्षा का शिकार होने के कारण बेकार पड़ा है. प्रारंभ के दिनों में विभिन्न तरह क ी वोटिंग से सरकार को अच्छी आय हो रही थी. यदि मत्स्यगंधा जलाशय के दिन लौटा दिए जाएं तो एक बार फिर यह लाखों की आमदानी का माध्यम बन जायेगा. इसी तरह महिषी में बना कोसी महासेतु भी किसी विशिष्ट पर्यटक स्थल से कम नहीं है. निर्माणाधीन काल से ही यह पिकनिक स्पॉट बना हुआ है. नये साल का मौका हो या दुर्गापूजा के नवमी-दसवीं का दिन हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. स्टेट ट्रांसपोर्ट बढ़ायेगा आमदनीसहरसा के सुपर बाजार रोड में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम क डिपो दशकों पूर्व खुला था. यहां से विभिन्न स्थानों के लिए स्टेट ट्रांसपोर्ट की दर्जनों गाडि़यां खुलती थी. राजनैतिक व प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ही यहां से खुलने वाली गाडि़यों की संख्या दो पर आकर सिमट गयी है. अभी सिर्फ दरभंगा के लिए रोजाना दो बसें खुलती हैं. यदि इस डिपो को पूर्व की तरह सुव्यवस्थित कर जान फूंकी जाये तो काफी कम समय में राज्य सरकार की आमदनी का बहुत बड़ा माध्यम बन जाएगा. कुटीर उद्योग को मिले बढ़ावासहरसा जिला मछली उत्पादन में समृद्ध है. यहां 50 प्रजाति की मछलियां पाली और बेची जाती है. यहां की मछलियां पश्चिम बंगाल सहित अन्य प्रांतों में निर्यात की जाती है. पानी फल सिंहारा व मखाना की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है. जिसमें से मखाना दिल्ली सहित देश के अन्य सभी बड़े शहरों में भेजे जाते हैं. गन्ना, मकई व बांस की खेती भी जिले के पर्याप्त खेतिहर भूमि पर होती है. जिसमें से गन्ना से बड़े पैमाने पर शक्कर तैयार किए जाते हैं. इस तैयार शक्करों का भी निर्यात देश भर में होता है. मक्का व बांस की सही कीमत या इस पर आधारित उद्योग नहीं होने से कोई आमदनी नहीं हो पाती है. किसान इसे सिर्फ अपने दम पर करते हैं. यदि इन्हें सुविधा मिले व कुटीर उद्योग का दर्जा मिले तो यह भी सरकार की आमदनी का बड़ा जरिया बन सकता है. फोटो- डिपो 4 – सुपर मार्केट समीप स्थित बस डिपो से कभी सभी जगहों के लिए खुलती थी गाड़ियांफोटो – मत्स्य 5 – शहर स्थित मत्स्यगंधा को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की है जरूरत

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