तीसरे दिन ट्यूमर में कर दिया वस्फिोट

Published at :22 Nov 2015 6:52 PM (IST)
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तीसरे दिन ट्यूमर में कर दिया वस्फिोट

तीसरे दिन ट्यूमर में कर दिया विस्फोट बेसिकान-2015 के तीसरे व अंतिम दिन जीस्ट पर हुई विस्तृत चर्चाब्रेस्ट कैंसर के बारे में किया गया जागरूकआधुनिक जांच की पद्धति से कराया गया अवगत प्रतिनिधि, सहरसा बेसिकान-2015 समाप्त हो गया. रविवार को तीसरे व अंतिम दिन सहभागियों को प्रमाणपत्र व देश-विदेश से आये अतिथियों का धन्यवाद कर […]

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तीसरे दिन ट्यूमर में कर दिया विस्फोट बेसिकान-2015 के तीसरे व अंतिम दिन जीस्ट पर हुई विस्तृत चर्चाब्रेस्ट कैंसर के बारे में किया गया जागरूकआधुनिक जांच की पद्धति से कराया गया अवगत प्रतिनिधि, सहरसा बेसिकान-2015 समाप्त हो गया. रविवार को तीसरे व अंतिम दिन सहभागियों को प्रमाणपत्र व देश-विदेश से आये अतिथियों का धन्यवाद कर कार्यक्रम की समाप्ति की गयी. लेकिन इससे पूर्व जाते-जाते भी चिकित्सक पेट सहित इसके आसपास के अंग में होने वाले ट्यूमर (पत्थर) में विस्फोट करते गये. समापन के पूर्व विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जीस्ट के बारे में बताया. इसे एक ऐसा ट्यूमर बताया गया जो चारों ओर से कवर्ड (कैप्सूलेटेड) होता है. यह सबसे ज्यादा खाने की थैली में पाया जाता है. इसके बाद खाने की नली की शुरूआती छोड़ (ड्यूडनम), मलद्वार के रास्ते (रैक्टम), बड़ी आंत व मांसपेशियों में भी होता है. विषय पर व्याख्यान देते आईजीआईएमएस पटना के डॉ केशव कुमार ने बताया कि पिछले पांच साल में ऐसे कुल 95 केस सामने आये हैं. जिसमें लगभग 10 केस कोसी क्षेत्र के लोगों का है. लक्षण की चर्चा करते बताया गया कि गैस व कब्ज की शिकायत बढ़ने लगे तो सचेत हो जाइये, आपके शरीर में ट्यूमर पनपने की संभावना बढ़ रही है. सामान्य स्थिति में इसका सामान्य ऑपरेशन किया जाता है, पर आकार बढ़ने पर ऑपरेट के बाद भी इसके फिर से पनपने की संभावना बढ़ जाती है. आकार बढ़ने पर इसे छूने से पता चल जाता है. हालांकि 80 से 90 प्रतिशत मरीज के पूर्णत: ठीक होने की संभावना रहती है. दूसरे सत्र में एम्स पटना के रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ प्रेम कुमार ने ब्रेस्ट इमेजिंग के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला. जिसके तहत प्लेन चेस्ट एक्सरे, मेमोग्राफी (स्क्रीनिंग टेस्ट), अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन को माध्यम बनाकर हर पहलू से अवगत कराया गया. सबसे पहले स्क्रिनिंग टेस्ट मेमोग्राफी करायी जाती है. लक्षण पता चलने पर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है. ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्यूमर ने शरीर के किस अंग को कहां तक क्षति पहुंचायी है. छोटा ट्यूमर हो तो एफएनएसी द्वारा देखा जाता है. जिसमें शरीर की कोशिका की जांच की जाती है. वाद-विवाद में मिला कैश अवार्ड समापन के ठीक पूर्व सबसे अंतिम सत्र में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. जिसमें प्रमाणपत्र के अलावा पांच, तीन व दो हजार रुपये का कैश अवार्ड भी दिया गया. इसमें सर्जरी से संबंधित सवाल पूछे गये. एक्सरे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड से संबंधित पीजी लेबल के सवाल पूछे गये. डॉ मनीष मंडल ने बताया कि पीजी के बाद छात्रों को रेजिडेंट चिकित्सक बनने की प्रक्रिया में वाइवा का सामना करना पड़ेगा. यह वाद-विवाद प्रतियोगिता बच्चों को उसमें मदद करेगा. ——————————-फले, फूले व समृद्ध बने सहरसा : डॉ जे लाल नये अध्यक्ष व सचिव के चुनाव के साथ समाप्त हुआ बेसिकॉन-2015 संचालन समिति के सदस्यों ने सफल आयोजन के लिए दिया धन्यवाद प्रतिनिधि, सहरसाबेसिकान-2015 के समापन के मौके पर नये अध्यक्ष व सचिव का चुनाव किया गया. सत्र समाप्ति के बाद निवर्तमान अध्यक्ष डॉ जे लाल ने भागलपुर के डॉ बीके सिन्हा को अध्यक्ष पद का भार सौंपा. जबकि पटना के डॉ बिन्दे कुमार ने अशोक कुमार सिन्हा को सचिव पद का दायित्व सौंपा. इससे पूर्व अपने अध्यक्षीय भाषण में निवर्तमान अध्यक्ष डॉ जे लाल ने सहरसा के फलने, फूलने व समृद्ध होने की कामना करते कहा कि तीन दिनों का इतना बड़ा आयोजन कराने में आयोजकों के साथ-साथ शहरवासी का भी योगदान है. आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ गोपाल शरण सिंह ने कहा कि आयोजन के कारण कोसी के सर्जनों को तकनीकी ज्ञान मिला. वर्कशॉप व सीएमई के द्वारा नये पहलुओं की जानकारी मिली. डॉ विजय शंकर के संचालन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने सफल कार्यक्रम के लिए सर्जन की टीम को बधाई दी. समिति के सचिव डॉ अवनीश कर्ण ने सभी डेलीगेटस, कोसी के चिकित्सक, दवा कंपनी व मीडिया को धन्यवाद देते उनकी भूमिका की काफी सराहना की. इस मौके पर विशिष्ट अतिथियों में डॉ अबुल कलाम, डॉ अजय सिंह, डॉ रंजेश सिंह, डॉ अनिमेष सिंह, डॉ तारिक, डॉ रवि कुमार व अन्य मौजूद थे. —————————–जागरूकता : ब्यूटी पार्लर के तौलिये से सावधान 90 प्रतिशत केस हेपेटाइटिस-बी का तौलिये के कारण अवश्य कराएं जांच, विशेषज्ञ दे रहे सलाह शिविर में 250 रक्त के नमूने में मिले दो निगेटिव केस प्रतिनिधि, सहरसा अगर आप ब्यूटी पार्लर या सैलून जाने के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाइए. कुर्सी पर बैठ कर खुद को सजाने संवारने की कोशिश में आप हेपेटाइटिस-बी का शिकार भी हो सकते हैं. आईजीआईएमस पटना के जीआई विभाग के एचओडी डॉ मनीष मंडल ने इस संबंध में जागरूक करते हुए कहा कि ब्यूटी पार्लर या सैलून में ब्लेड या अन्य उपकरण तो बदल देते हैं पर तौलिया वही रहता है. यह हेपेटाइटिस-बी होने का सबसे बड़ा कारण है. इसका वायरस खुले वातावरण में भी सात दिनों तक जीवित रहता है. इसके वायरस का प्रकार मूत्र, पसीना, मल व रक्त से होता है. डॉ मंडल ने बताया कि सामान्यत: मरीज तब सचेत होते हैं जब उन्हें जौंडिस हो जाता है. हमारे क्षेत्र में धड़ल्ले से पार्लर चल रहे हैं, जहां सफाई का विशेष ख्याल नहीं रखा जाता. इसलिए शेव कराते वक्त या पार्लर का तौलिया इस्तेमाल करते वक्त अच्छी तरह सुनिश्चित कर लें कि तौलिया साफ या स्वच्छ है. नहीं तो घर से खुद का तौलिया लेकर ही जाएं. क्योंकि एकमात्र यही ऐसा वायरस है, जो शरीर से निकलने के सात दिन बाद तक जीवित रहता है. इंफेक्शन का पता भी पीलिया होने के बाद ही चलता है. सभी व्यक्तियों को 0-1-6ह का एंटीडोज अवश्य लेना चाहिए. एक डोज लेने के एक महीने व छह महीने के बाद इंजेक्शन लगाना चाहिए. लीवर को डैमेज करने वाले इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है. बच्चों को इसका टीका जरूर लगाएं. इस मौके पर हेपेटाइटिस-बी की मुफ्त जांच की गयी. जिसमें 250 लोगों ने रक्त का नमूना दिया. इनमें दो का नमूना निगेटिव पाया गया. ————————-बेस्ट पोस्टर अवार्ड से सम्मानित हुई श्रद्धा सहरसा. बेसिकॉन-2015 के तहत दूसरे दिन शुक्रवार को पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. जिसका परिणाम तीसरे दिन शनिवार को घोषित किया गया. एसएमवी मेडिकल कॉलेज पांडिचेरी में पीजी के प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही डॉ श्रद्धा कर्ण को बेस्ट पोस्टर अवार्ड से सम्मानित किया गया. डॉ श्रद्धा ने थायरायड कैंसर पर पोस्टर प्रदर्शनी लगायी थी. ———————–डॉ संजय कुमार को मिला गोल्ड मेडल सहरसा. समारोह के अंतिम दिन अग्नाशय कैंसर पर अपना शोध प्रस्तुत करने वाले डॉ संजय कुमार को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया. साथ ही इन्हें डॉ बीएन सिंह मेमोरियल रिसर्च पेपर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. ज्ञात हो कि चिकित्सा के क्षेत्र में 45 वर्ष से कम उम्र के डॉक्टरों को यह सम्मान दिया जाता है.

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