तीन गाड़ियों के जाने के बाद भी है यात्रियों की भीड़

सहरसा : शनिवार को सहरसा जंक्शन पर यात्रियों के हंगामा मचाये जाने के बाद रेलवे ने एक अतिरिक्त ट्रेन भेज मजदूर यात्रियों की भीड़ कम करना चाही, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के जाने के बाद भी स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ यथावत रही. रविवार को दैनिक जनसेवा एक्सप्रेस के अलावे एक पूर्व घोषित समर […]
सहरसा : शनिवार को सहरसा जंक्शन पर यात्रियों के हंगामा मचाये जाने के बाद रेलवे ने एक अतिरिक्त ट्रेन भेज मजदूर यात्रियों की भीड़ कम करना चाही, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के जाने के बाद भी स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ यथावत रही.
रविवार को दैनिक जनसेवा एक्सप्रेस के अलावे एक पूर्व घोषित समर स्पेशल एवं एक अन्य स्पेशल ट्रेन अंबाला के लिए रवाना हुई. हालांकि थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल पर तीन ट्रेनों के खुलने से हजारों यात्री सवार हो यहां से निकल गये, लेकिन फिर भी हजारों शेष रह गये. पूरा स्टेशन परिसर मजदूरों से पटा रह गया. टिकट कटाने वालों की भीड़ कई कतारों में बाहर तक पहुंच गई थी.
मालूम हो कि धनरोपनी के समय हर साल कोसी के इलाके से लाखों की संख्या में मजदूर पंजाब सहित अन्य प्रांत जाते रहे हैं. चार ट्रेन के यात्रियों के एक ही ट्रेन में सवार होने के प्रयास में हर साल विकट स्थिति पैदा होती है.
मजदूरों को तीन से चार दिनों तक यहीं प्लेटफॉर्म पर रूक कर ट्रेन में सवार होने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है. कई दिनों के प्रयास के बाद भी ट्रेन पर सवार नहीं हो पाने वालों का गुस्सा परवान चढ़ता है और वे अधीर हो सारा गुस्सा रेल संपत्ति को क्षति पहुंचा उतारते हैं.
शनिवार को भी यही हाल हुआ था, जब तीन-चार दिनों से प्लेटफॉर्म पर बैठे मजदूरों को ट्रेन में घुसने की भी जगह नहीं मिली तो पहले इंजन को बोगी से जुड़ने से रोक प्रदर्शन किया. फिर ट्रेन में पहले से सवार लोगों को खाली कराने के लिए खूब पत्थर बरसाये. रोड़ेबाजी के कारण स्टेशन परिसर में घंटो अफरातफरी मची रही. जनसेवा एक्सप्रेस को भी भारी क्षति हुई. घंटे भर के उत्पात के बाद पुलिस को बल प्रयोग कर मामले को शांत कराना पड़ा और फिर गाड़ी स्टेशन से रवाना हो सकी.
* सीट छेंकने बरौनी तक जाते हैं यात्री
जून महीने में सहरसा जंक्शन का नजारा बिल्कुल बदल जाता है. सहरसा सहित सुपौल, मधेपुरा, अररिया व नेपाल तक के मजदूरों का यह स्टेशन जंक्शन बन जाता है. वे यहां पहुंच कर जनसेवा एक्सप्रेस या जनसाधारण एक्सप्रेस पकड़ पंजाब की ओर जाते हैं. बड़ी संख्या में जाने वालों के सामने ट्रेनें छोटी पड़ जाती है.
मजदूरों को ट्रेन में जगह पाने के लिए तीन से चार दिनों तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कभी-कभी तो मजदूरों के साथ लाया गया पैसा यहीं खाते-पीते समाप्त हो जाता है. जबकि कई मजदूर जनसेवा ट्रेन के सहरसा पहुंचते ही उसमें सवार हो जाते हैं. वे बरौनी तक जाते हैं और उसी सीट पर बैठ कर पुन: सहरसा आकर यहां से पंजाब के लिए रवाना होते हैं.
ट्रेन में जगह नहीं पाने वालों के गुस्से का एक कारण यह भी होता है. हर साल इनका गुस्सा उबाल खाता है और रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचा कर ही शांत होता है.
* सहरसा से अमृतसर : सिर्फ एक ट्रेन ही चलती है
सहरसा : सहरसा से अमृतसर के लिए दो ट्रेन हैं. इनमें से जनसेवा एक्सप्रेस रोज चलती है, जबकि जनसाधारण एक्सप्रेस सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को चलती है. इसके अलावे गरीब रथ सप्ताह में तीन दिन रविवार, सोमवार एवं गुरुवार को चलती है. लेकिन गरीब रथ से यात्रा करने वालों में ये मजदूर शामिल नहीं होते हैं. गरीब रथ में रिजर्वेशन करा संपन्न घराने के लोग ही चलते हैं.
मंडल व जोनल रेल को चाहिए कि धनरोपनी के समय सहरसा जंक्शन से पंजाब जाने के लिए रोजाना की अतिरिक्त ट्रेन की व्यवस्था करे. इसी तरह दिवाली से पहले मजदूरों के लौटने के लिए उधर से भी रोज की गाड़ी होनी चाहिए, ताकि हंगामे व रेलवे को क्षति पहुंचाने वाले उत्पात पर विराम लगाया जा सके.
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