मुबारक के घर में मातम : दो बेटों ने पिता को दिया था भरोसा, अगली बार आऊंगा तो बहन का करूंगा निकाह
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Dec 2019 8:42 AM
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कुमार आशीष सहरसा : दिल्ली से बेटों की सलामती को लेकर सहरसा जिले के कहरा प्रखंड स्थित नरियार गांव में रोजाना फोन आते ही रहते थे. गांव के करीब 60 युवा दिल्ली में काम कर गांव में रह रहे अपने परिवार के जीवन यापन का सहारा बने हुए हैं. रविवार को 10 बजे गांव में […]
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कुमार आशीष
सहरसा : दिल्ली से बेटों की सलामती को लेकर सहरसा जिले के कहरा प्रखंड स्थित नरियार गांव में रोजाना फोन आते ही रहते थे. गांव के करीब 60 युवा दिल्ली में काम कर गांव में रह रहे अपने परिवार के जीवन यापन का सहारा बने हुए हैं. रविवार को 10 बजे गांव में बजने वाली फोन की घंटी ने गांव के माहौल को गमगीन कर दिया.
गांव के चारों तरफ चीत्कार के स्वर उठने लगे. सभी एक दूसरे से बात कर फोन पर अपने लोगों की जानकारी लेने लगे. इसी क्रम में बुजुर्ग मो सत्तार ने भी अपने परिचितों को दिल्ली में फोन लगाकर वहां काम कर रहे अपने दोनों पुत्र मो मुबारक व मो ग्यास की सलामती लेनी चाही तो पल भर के लिए उनकी सांसें थम-सी गयीं.
दिल्ली से लोगों ने फोन पर सत्तार को बताया कि जैकेट फैक्ट्री में काम करने के दौरान उसके दोनों बेटों के साथ अनहोनी हो गयी है. इसके बाद सत्तार ने कई बार कोशिश की, पर उन्हें किसी से संपर्क नहीं हो सका, जिसके बाद मो सत्तार अपने कलेजे के टुकड़े को देखने पत्नी व दामाद के साथ गरीब रथ से दिल्ली के लिए रवाना हो गये.
बेटे के साथ उजर गयीं सत्तार की दुनिया
नरियार गांव में फूस के मकान में अपनी चार बेटियों व पत्नी के साथ जीवन बसर कर रहे मो सत्तार को अपने दोनों पुत्रों पर बहुत नाज था. दिल्ली में काम करने के लिए जाते वक्त बेटों ने पिता को भरोसा दिलाया था कि मेहनत से परिवार के हालात बदल देंगे. बड़ा पुत्र मुबारक व छोटा ग्यास ने पिता को भरोसा दिलाया था कि इस बार लौटते ही बहन के निकाह की व्यवस्था करनी है.
साल भर पहले हुई थी मुबारक की शादी
दिल्ली की जैकेट फैक्ट्री में काम करने वाले मुबारक की शादी साल भर पहले किशनगंज की रहने वाली गुलशन के साथ हुई थी. मुबारक को 10 माह की बेटी आलिया परवीन भी है. पति के मौत की खबर मिलते ही गुलशन बेहोश हो गयी. उसे बार-बार होश में लाने की कोशिश नाकाम हो रही है. घर के लोग बताते हैं कि मुबारक बोल कर गये थे कि अगली बार गुलशन को भी साथ में दिल्ली लेकर जायेंगे. पुरानी बातों को याद कर लोगों की आंख लगातार नम हो रही है.
शकीला व फरजाना के साथ रो रहा था गांव
मृत दोनों भाइयों की दो छोटी बहनें ऐसे बिलख रही थीं कि मानो उनका सपना ही टूट गया हो. शकीला 10वीं व फरजाना सातवीं कक्षा में गांव के स्कूल में ही पढ़ती है.
शकीला ने बताया कि घर की हालत ठीक नहीं है, लेकिन भाई ने कहा कि पढ़ाई करो. अगले साल मैट्रिक की परीक्षा देनी है. दोनों बहनों के चीत्कार से गांव की गलियां भी दहलने लगी हैं. गांव में जमा लोगों की भीड़ भी इन दोनों बच्चियों को ढांढ़स बंधाने के बजाय स्वयं के आंसू को नहीं रोक पा रही है.
एक की हुई शादी, तीन बहनों की थी जिम्मेदारी
मुबारक व ग्यास पिता व माता का ही सहारा नहीं, बल्कि चार बहनों का भाई भी था. सभी बहनों अपने भाई के साथ हुई घटना की खबर मिल गयी है. बड़ी बहन शबाना की शादी हो गयी है. वह अभी मायके में ही थी. शबाना बार-बार अपने भाई को याद कर बेहोश हो जा रही है. उसके किसी भी सवाल का लोगों के पास जवाब नहीं है. दूसरी बहन फरजाना पहले से काफी दुखी है. शादी के बाद पति ने उसे छोड़ दिया है. इसके बाद दोनों भाई ही उसकी जिम्मेदारी उठाये हुए थे. उसकी तो मानो दुनिया ही ऊपरवाले ने उजाड़ दी थी.
पांच बच्चों के सिर से पिता का उठा साया
सहरसा : इस अग्निकांड में नरियार के एक ही परिवार में पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया. 50 वर्षीय मो समीम उसी फैक्टरी में काम करता था और वहां से कमाये रुपये घर भेजकर बच्चों का पालन करता था.
सूचना मिलते ही कोहराम मच गया. पत्नी व बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है. पुत्र वसीम खबर मिलते ही दिल्ली रवाना हो गया. परिजनों ने बताया कि समीम के छोटे भाई नजीम की छह महीने पहले कैंसर से मौत हो गयी थी. उसके बाद पूरे परिवार की देखभाल करने वाला समीम अकेला था. उसकी चार बेटियों में सिर्फ एक की शादी हुई है. तीन बेटियों व बेटे के भविष्य की चिंता सता रही है.
बाहर से लगा दिया था ताला, कैसे निकलते लोग
सहरसा : दिल्ली में लगी आग हादसे में नरियार की रूबैना खातून का 15 साल का नाती मो अफजल भी जल कर मर गया. सूचना मिलने के बाद नानी रूबैना खातून का बुरा हाल है. वह बार-बार बेसुध होकर गिर जाती है. रोते हुए रूबैदा खातून कहती है कि फैक्ट्री में बाहर से ताला लगा दिया था. बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं था. कैसे निकलते बच्चे. रूबैदा कहती हैं कि जो कमरा था, उसमें 40 से 45 आदमी काम कर रहे थे. उनमें एक हमारा नाती भी था. जब से घटना हुई है, उसकी कोई खबर नहीं मिल रही है. मालूम हो कि अफजल का घर नरियार पंचायत के ही लतहा गांव में है.
नरियार में पसरा है मातमी सन्नाटा
कहरा : दिल्ली की अनाज मंडी की चार मंजिली इमारत में लगी आग से चौथे माले पर एक जैकेट फैक्ट्री भी आग के चपेट में आने से सदर प्रखंड कहरा के नरियार गांव के आधा दर्जन से अधिक लोगों के मर जाने एवं कई के अब तक लापता होने के बाद नरियार गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया है. सभी मृतकों व लापता लोगों के परिवार में कोहराम मच गया है. रविवार सुबह दिल्ली में आग लगने की घटना नरियार गांव में करीब करीब सभी जान रहे थे. लेकिन नरियार के लोगों की मरने की घटना में किसी को कोई अंदेशा नहीं था.
दिल्ली में उस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को आशंका के बाद कई लोगों के परिजनों ने दिल्ली में अपने लोगों का हालचाल जानने के लिए फोन लगाना शुरू किया. लेकिन फोन नहीं लगने के बाद लोगों का अंदेशा बढ़ने लगा. पूर्व से दिल्ली में काम करने के वाले और जैकेट फैक्ट्री खोलने वाले नरियार निवासी मोहम्मद जुबेर के साथ दिल्ली के गये परिजनों द्वारा जानकारी में लग गये. लेकिन मोहम्मद जुबेर से भी बात नहीं हुई.
उसके बाद परिजनों द्वारा दिल्ली में दूसरी जगह काम कर रह रहे अपने परिचितों से हाल-चाल जानने के दौरान दोपहर बाद घटना की विस्तृत जानकारी मिलनी शुरू हुई. धीरे-धीरे शाम तक इस घटना में मारे जाने के लोगों की जानकारी मिलती गयी. कई परिजनों को अपने लोगों का अभी तक पता भी नहीं चल रहा था. उनका मोबाइल भी नहीं लगने के कारण वे लोग भी कुछ अनहोनी होने की आशंका में मातम मना रहे थे.
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