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मॉनसून आया, तो सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज सिस्टम निर्माण की बनी योजना, 30 से 40 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं

Updated at : 12 Jul 2019 6:46 AM (IST)
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मॉनसून आया, तो सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज सिस्टम निर्माण की बनी योजना, 30 से 40 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं

सहरसा : रेल विभाग की कार्यप्रणाली की लापरवाही सर्कुलेटिंग एरिया में आकर पता चलती है. सूखे का समय बीत गया और जब मॉनसून सामने आया तो अब जाकर जलजमाव की समस्या से निजात पाने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा ड्रेनेज निर्माण की योजना तैयार की गयी है. यहां तक की डीआरएम के निर्देश का फालोअप […]

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सहरसा : रेल विभाग की कार्यप्रणाली की लापरवाही सर्कुलेटिंग एरिया में आकर पता चलती है. सूखे का समय बीत गया और जब मॉनसून सामने आया तो अब जाकर जलजमाव की समस्या से निजात पाने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा ड्रेनेज निर्माण की योजना तैयार की गयी है. यहां तक की डीआरएम के निर्देश का फालोअप नहीं किया गया.

अब लगता है इस वर्ष भी रेल यात्रियों को रेलवे परिक्षेत्र में जलजमाव की स्थिति से दो-चार होना पड़ेगा. स्थिति यह है कि हल्की बारिश में भी रेल परिक्षेत्र का चप्पा-चप्पा जलमग्न हो जाता है. जबकि पूरा मॉनसून अभी तो बाकी है. सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण का जायजा लिया गया तो देखकर पता चलता है कि 30-40 प्रतिशत ही काम पूरा हो सका है.
ऐसे में एक बार फिर स्टेशन परिसर का बाहरी हिस्सा पानी-पानी होगा. हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि ड्रेनेज सिस्टम कार्य 15 दिनों में पूरा हो सकेगा. लगातार दो-तीन दिनों से बारिश के कारण कार्य ठप है. लेकिन अधिकारियों के दावे की पोल सर्कुलेटिंग एरिया में आने के बाद खुलती नजर आती है. बता दें कि करीब 13 करोड़ की लागत से सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार होना है. जिसमें फूट ओवरब्रिज, पार्किंग, ड्रेनेज सिस्टम सहित कई अन्य कार्य होने हैं.
इसके तहत पहली प्राथमिकता सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज निर्माण की है. इसके निर्माण का जिम्मा सुनील कुमार बेगुसराय एजेंसी को दिया गया है. दरअसल सहरसा जंक्शन को मॉडल श्रेणी स्टेशन का दर्जा दिया गया है. यात्री सुविधा के विस्तार के लिए कई कार्य योजनाएं चलायी जा रही है. यात्री सुविधाओं में पहली प्राथमिकता स्टेशन पर मॉनसून में जलजमाव से निजात के लिए बनायी गयी थी.
इसके तहत सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज सिस्टम निर्माण होना है. रेल परिक्षेत्र के अंदर व बाहर हर मॉनसून जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. पूरा एरिया पानी-पानी हो जाता है. सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ती है. मुख्य गेट से लेकर स्टेशन परिसर तक हल्की बारिश में पानी जमा रहता है. यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में काफी मशक्कत उठानी पड़ती है. ऐसे में पिछले वर्ष ही कान्ट्रेक्टर को ड्रेनेज निर्माण कार्य पूरा कर लेना था.
जबकि पिछले वर्ष सर्कुलेटिंग एरिया का निरीक्षण करने पहुंचे तत्कालीन डीआरएम आरके जैन ने भी ड्रेनेज सिस्टम पूरा करने का निर्देश जारी किया था. वहीं मामले में पूछने पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सर्कुलेटिंग एरिया में मिट्टी भराई से लेकर कई काम अधूरा था. अब जाकर मिट्टी भराई हो सकी है. वहीं इस मामले में एडीईएन मनोज कुमार ने बताया कि 15 दिनों में ड्रेनेज निर्माण कार्य पूरा होगा. युद्धस्तर पर काम चल रहा है. ड्रेनेज सिस्टम से जुड़े कई कार्य किए जा चुके हैं. लगातार हो रही बारिश की वजह से थोड़ी देरी हुई है.
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