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यात्रियों का सफर पहले से अधिक आरामदायक व सुरक्षित

Updated at : 03 Apr 2019 1:40 AM (IST)
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यात्रियों का सफर पहले से अधिक आरामदायक व सुरक्षित

सहरसा : रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है. 10 दिनों के अंदर सहरसा से पटना जाने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस एलएचबी कोच से लैस होकर चलेगी. इस कोच के लगने से यात्रियों का सफर पहले से और ज्यादा आरामदायक व सुरक्षित होगा. पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि सहरसा यार्ड व वाशिंग में एलएचबी […]

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सहरसा : रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है. 10 दिनों के अंदर सहरसा से पटना जाने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस एलएचबी कोच से लैस होकर चलेगी. इस कोच के लगने से यात्रियों का सफर पहले से और ज्यादा आरामदायक व सुरक्षित होगा. पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि सहरसा यार्ड व वाशिंग में एलएचबी की पहले फिटनेस जांच होगी.

इसके बाद रिपोर्ट समस्तीपुर डिवीजन के अधिकारियों को भेजी जायेगी. इसके बाद ही राज्यरानी में एलएचबी कोच जोड़ा जायेगा. फिलहाल कोच को सहरसा यार्ड में जगह नहीं रहने के कारण सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर लाइन नंबर दो पर लगाया गया है.
एक-दो दिनों में कोच को फिटनेस जांच के लिए सहरसा यार्ड में भेजा जायेगा. बता दें कि 13 मार्च को प्रभात खबर ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. पूर्व मध्य रेलवे के डीआरएम आरके जैन ने प्रभात खबर को बताया था कि जल्द ही राज्यरानी एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगेगी.
2019 मॉडल की बनी है सभी एलएचबी कोच . यात्रियों के लिए सबसे अच्छी खबर यह है कि सभी एलएचबी कोच वर्ष 2019 के मॉडल की है, निर्मित है. कपूरथला से सीधे सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची है. सभी कोच जर्मन की नयी तकनीक से बनी है. इसमें यात्रियों के बैठने के सीटों की संख्या भी बढ़ेगी. एक कोच में यात्रियों की बैठने की 100 सीटें होगी.
वहीं वर्तमान में राज्यरानी एक्सप्रेस में तीन एसी चेयर कार है. जबकि एलएचबी कोच लगने के बाद एक एसी चेयर कार हटाया जायेगा. एलएचबी कोच के एक एसी चेयर कार में बैठने की 78 सीटें होंगी. जबकि सामान्य कोच में बैठने की सीटें मात्र 72 है. राज्यरानी में कुल 21 एलएचबी कोच लगेंगे.
एलएचबी कोच की खासियत . यह एक तरह का जर्मन तकनीक से डिजाइन किया गया कोच है. सीबीसी कपलिंग होने के कारण यह एक अलग कोच है, जो सामान्य कोच से काफी सुरक्षित है. स्नैकस टेबल होने के कारण अगर ट्रेन रफ्तार में हो और कोच के अंदर कोई यात्री गिरे तो उन्हें चोटें कम आयेगी और गिरने की संख्या भी कम होगी.
दुर्घटना के समय कोच पटरी से उतर सकता है, पर पलट नहीं सकेगा. इसकी सीटें काफी आरामदायक होती है और कोच की बनावट इंटेरियर ऐसी होती है कि यात्रा के दौरान परेशानी कम होती है. इसके अलावा एसी कोच में फैन नहीं होता है. पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों ने दावा किया है कि अब तक इस कोच में सफर करने पर दुर्घटना का प्रतिशत शून्य रहा है.
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