दुकान में कम, सड़क पर ज्यादा सजती है दुकानें

सहरसा : प्रमंडलीय मुख्यालय में सड़कों का अतिक्रमण करना लोग अपनी शान समझते हैं. मुख्य बाजार हो या मोहल्ले की सड़क, जो जितना अतिक्रमण कर सड़क को संकुचित करते हैं, वे उतना ही अपने आपको प्रभावशाली समझते हैं. शहर में कपड़े का मुख्य बाजार कपड़ापट्टी जाना व वापस आने में कम जद्दोजहद नहीं है. दहलान […]
सहरसा : प्रमंडलीय मुख्यालय में सड़कों का अतिक्रमण करना लोग अपनी शान समझते हैं. मुख्य बाजार हो या मोहल्ले की सड़क, जो जितना अतिक्रमण कर सड़क को संकुचित करते हैं, वे उतना ही अपने आपको प्रभावशाली समझते हैं. शहर में कपड़े का मुख्य बाजार कपड़ापट्टी जाना व वापस आने में कम जद्दोजहद नहीं है. दहलान चौक से जाएं या महावीर चौक होकर कपड़ा पट्टी जाने व आने में कम से कम एक घंटे का समय लगता है. जिस पर न ही जिला प्रशासन का और न ही व्यवसायियों का ही ध्यान जा रहा है. स्थिति यह है कि कोई सड़क पर सामान रख तो कोई नाला के ऊपर सीढ़ी बना कर सड़क को अतिक्रमित कर दिया है.
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