वैशाली एक्सप्रेस से गिरा युवक, तड़पता रहा जख्मी, लोग बनाते रहे वीडियो, मानवता हुई शर्मसार

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वैशाली एक्सप्रेस से गिरा युवक, तड़पता रहा जख्मी, लोग बनाते रहे वीडियो, मानवता हुई शर्मसार

वैशाली एक्सप्रेस से गिरा युवक, तड़पता रहा जख्मी,

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सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन के पटरी पर 40 मिनट तक पड़ा रहा घायल अस्पताल ले जाने में हुई देरी, रास्ते में ही तोड़ा दम अस्पताल के कर्मी भी इलाज से कतराते दिखे, परिजन सहरसा के लिए रवाना सहरसा. पूर्व मध्य रेलवे के सहरसा-मानसी रेलखंड के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया. सहरसा से दिल्ली जा रही वैशाली एक्सप्रेस से गिरकर एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे में उसके दोनों पैर और एक हाथ कट गए. घायल अवस्था में वह प्लेटफॉर्म संख्या-1 की पटरी पर तड़पता रहा, लेकिन काफी देर तक कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. घायल की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र अंतर्गत बीरपुर पंचायत, वार्ड संख्या-12 निवासी गनोर साह के 45 वर्षीय पुत्र अजीत कुमार के रूप में हुई है. मिली जानकारी के अनुसार, अजीत सहरसा में एक बर्तन की दुकान में काम करता था और गुरुवार सुबह वैशाली एक्सप्रेस से अपने घर मुजफ्फरपुर जा रहा था. इसी दौरान ट्रेन के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंचते ही वह अचानक चलती ट्रेन से गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया. मानवता हुई शर्मसार घटना के बाद स्टेशन पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन घायल अजीत करीब 40 मिनट तक पटरी के पास तड़पता रहा. दर्जनों लोग मौके पर मौजूद थे, फिर भी किसी ने उसे उठाकर अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की. आखिरकार, कुछ स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए सिमरी बख्तियारपुर अस्पताल को सूचना दी. सूचना मिलते ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल को आनन-फानन में सिमरी बख्तियारपुर अस्पताल ले जाया गया. रास्ते में ही हो गयी मौत अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल सहरसा रेफर कर दिया. लेकिन सदर अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही अजीत ने दम तोड़ दिया. इस दौरान अनुमंडल अस्पताल में इलाज से भी अस्पताल कर्मी परहेज करते नजर आये. लोग मोबाइल से बनाते रहे वीडियो घटना के समय घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. लेकिन मदद करने के बजाय अधिकांश लोग अपने मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त रहे. घायल की हालत देख आसपास के लोग सहमे हुए थे, लेकिन किसी ने तत्काल उसे उठाने की पहल नहीं की. इस घटना ने एक बार फिर समाज में संवेदनहीनता और घटती मानवता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जरूरत के समय मदद के लिए आगे आने के बजाय तमाशबीन बने लोगों का रवैया मानवता को शर्मसार करने वाला रहा.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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