बेटों के इलाज के लिए नहीं हैं पैसे, चािहए मदद

सिमरी : सहरसा-मानसी रेलखंड के बाबा रघुनी हॉल्ट पर ट्रेन की चपेट में आने से हुई मां-बेटी की मौत के बाद बख्तियारपुर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेज दिया. हालांकि पोस्टमार्टम के बाद सिमरी पहुंचा शव पैसे के अभाव में घंटों घर के बरामदे पर पड़ा रहा. […]
सिमरी : सहरसा-मानसी रेलखंड के बाबा रघुनी हॉल्ट पर ट्रेन की चपेट में आने से हुई मां-बेटी की मौत के बाद बख्तियारपुर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेज दिया. हालांकि पोस्टमार्टम के बाद सिमरी पहुंचा शव पैसे के अभाव में घंटों घर के बरामदे पर पड़ा रहा. मृतक की सास बुधनी देवी ने बताया कि साहेब, हम बहुत गरीब हैं.
अंतिम संस्कार तक का पैसा नहीं है. जैसे-तैसे जिंदगी काट रहे हैं. बुधनी देवी ने कहा कि मुखिया जी से शव के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी पर कुछ भी नहीं मिला. इधर घटना में बचे और सहरसा में इलाजरत सिमरी निवासी सनोज राम के दो बच्चे आशिक और राहुल की भी स्थिति चिंताजनक है. दोनों बच्चों को घटना के बाद सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
जहां बच्चे की स्थिति गंभीर देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया. इसके बाद परिजन दोनों बच्चे को लेकर एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे. जहां बच्चों का इलाज तो शुरू हुआ लेकिन अस्पताल के खर्च को दे पाने में बच्चों के पिता असक्षम साबित हो रहे हैं.
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