शहरी जलापूर्ति योजना पर निर्भर हुए पूर्वी क्षेत्र के लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 May 2017 8:27 AM (IST)
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सासाराम ऑफिस : शहर के पूर्वी इलाके में पेयजल की किल्लत होने लगी है. पुरानी बस्तियों की बात कौन कहे, नयी बस्तियों में भी पानी को लेकर काफी परेशानी है. शहर के पूर्वी क्षेत्र को पुराना जीटी रोड दो हिस्से में बांटता है. उत्तरी क्षेत्र में कमोबेश भूमिगत जल करीब दो सौ फुट के बाद […]
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सासाराम ऑफिस : शहर के पूर्वी इलाके में पेयजल की किल्लत होने लगी है. पुरानी बस्तियों की बात कौन कहे, नयी बस्तियों में भी पानी को लेकर काफी परेशानी है. शहर के पूर्वी क्षेत्र को पुराना जीटी रोड दो हिस्से में बांटता है. उत्तरी क्षेत्र में कमोबेश भूमिगत जल करीब दो सौ फुट के बाद मिल जा रहा है, लेकिन उत्तरी इलाके में कहीं-कहीं ढाई से तीन सौ फुट के बाद भी नहीं मिल पाता है.
प्रति वर्ष इस क्षेत्र में जलस्तर खिसकने से पुराने चापाकल व बोरिंग पानी देना बंद कर देते हैं. लोगों की माने तो पुराने घरों में कई ऐसे हैं, जहां 10 वर्ष में ही कई बार चापाकल का बोर करवाना पड़ा है. उत्तरी क्षेत्र में कई जगहों पर पथरिली जमीन होने के कारण चापाकल के बोर पर खर्च भी ज्यादा आता है.
प्रभात खबर की टीम जब इस इलाके का मुआयना की तो पूर्वी क्षेत्र के वार्ड आठ, 31, 32, 33, 34, 35, 36, 37 के मुहल्लों में कई घरों के चापाकल बंद मिले. हालांकि, वार्ड 34 में बरसात में करीब तीन माह तक जलजमाव हुआ था.
बावजूद इसके जलस्तर पर उसका कोई असर नहीं पड़ा. जिन घरों में बोरिंग है उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं है. कई सरकारी चापाकल तो अप्रैल में ही पानी देना बंद कर चुके हैं. नयी बस रही बस्तियों में बोरिंग की स्थिति अच्छी नहीं है. इसका कारण लोग जलस्रोतों के बंद होने को मान रहे हैं. कुएं का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है.
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