साथी को भगाने के संदेह में मारी थी युवक को गोली!

Published at :04 Mar 2017 7:53 AM (IST)
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साथी को भगाने के संदेह में मारी थी युवक को गोली!

बुधवार की शाम कैमूर पहाड़ी में नक्सलियों ने की थी एक युवक की हत्या सासाराम नगर : दरिगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत कैमूर पहाड़ी पर बसे गोरेया गांव में युवक की हत्या संदेह में नक्सलियों ने की थी. बुधवार की शाम टीपीसी के हार्डकोर नक्सली अनिल कुशवाहा उर्फ संदेश ने युवक जितेंद्र खरवार को गोली मार […]

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बुधवार की शाम कैमूर पहाड़ी में नक्सलियों ने की थी एक युवक की हत्या
सासाराम नगर : दरिगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत कैमूर पहाड़ी पर बसे गोरेया गांव में युवक की हत्या संदेह में नक्सलियों ने की थी. बुधवार की शाम टीपीसी के हार्डकोर नक्सली अनिल कुशवाहा उर्फ संदेश ने युवक जितेंद्र खरवार को गोली मार हत्या कर दी थी. मामले में परिजन व पुलिस ने कहा कि खाना नहीं पहुंचने पर नक्सलियों ने गुस्से में युवक की हत्या की थी. सूत्र बताते हैं कि यह मामला नहीं था. 28 फरवरी की शाम गोरेया गांव में कामता खरवार के घर बारात आयी थी. शाम में चार बजे नदी किनारे शौच करने जितेंद्र अपने दोस्तों के साथ गया था.
वहीं, जंगल में अपने दस्ता के साथ अनिल कुशवाहा था. जितेंद्र से नक्सली ने दो दिन खाना पहुंचाने काे कहा था. उस दस्ते में विजय खरवार, लालजी पासी, प्रमोद तिवारी, राम प्रवेश कुशवाहा, मारूल पासी, बबलू कुशवाहा व समीर पासवान थे. रात आठ बजे तक जब खाना लेकर जितेंद्र नहीं आया तो विजय खरवार गांव में पहुंच गया. वह दस्ते से भागने के फिराक में था. विजय खरवार का अब टीपीसी से मोह भंग हो गया था.
गोरेया में पहुंचने पर विजय खरवार शराब पीने के बाद खाना खाया और रात में ही बाइक से कैमूर की ओर निकल गया. विजय के मन में क्या चल रहा है इसकी भनक अनिल को लग गयी थी. जब देर रात तक नहीं पहुंचा, तो दस्ता से लालजी पासी को भेजा. वापस लौटने पर लालजी ने विजय के भागने की पुष्टि कर दी. इससे अनिल कुशवाहा क्रोधित हो उठा. गांव में बारात आयी थी .बहुत लोग पहुंचे थे. इससे अनिल गांव में प्रवेश नहीं कर सका व लोगों के जाने का इंतजार करने लगा. तब तक खबर मिली की विजय हथियार के साथ कैमूर पुलिस के कब्जे में है.
इससे नाराज होकर अनिल ने बुधवार की शाम होते ही गांव में घुस जितेंद्र को घर से बुला गोली मार दी. जितेंद्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. अनिल को शक था कि खरवार जाति के होने के कारण विजय खरवार को पार्टी छोड़ने के लिए उकसाया था. वहीं एक ग्रामीण शंभू खरवार ने कहा कि विजय कैमूर पुलिस से बात कर चुका था. सिर्फ समय का इंतजार था. मौका मिलते ही भाग निकला.
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