कुंठित हो रहीं प्रतिभाएं अनदेखी. शहर में नहीं है ढंग का खेल मैदान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Feb 2017 6:15 AM (IST)
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शहर में उपलब्ध है खाली सरकारी भूमि डेहरी कार्यालय : शहर में ढंग का खेल मैदान नहीं होने के कारण खिलाड़ियों की प्रतिभाएं कुंठित हो रही है. पहले से शहर में दो खेल मैदान हैं जिसकी बदहाली को देख यहां के खिलाड़ी काफी मायूस हैं. अधिकारियों से लेकर जन प्रतिनिधियों तक शहर में एक ढंग […]
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शहर में उपलब्ध है खाली सरकारी भूमि
डेहरी कार्यालय : शहर में ढंग का खेल मैदान नहीं होने के कारण खिलाड़ियों की प्रतिभाएं कुंठित हो रही है. पहले से शहर में दो खेल मैदान हैं जिसकी बदहाली को देख यहां के खिलाड़ी काफी मायूस हैं. अधिकारियों से लेकर जन प्रतिनिधियों तक शहर में एक ढंग से खेल मैदान या स्टेडियम बनवाने की गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं. खेल मैदान के रूप में राज्यस्तरीय मैदान के रूप में जाना जाने वाला डेहरी का पड़ाव मैदान अतिक्रमण के कारण सिमट कर काफी छोटा हो गया है. यहीं नहीं सड़क से काफी नीचा रहे उक्त मैदान हल्की बारिश में ही तालाब बन जाता है. शहर के मुख्य बाजार से सटे उक्त मैदान के
एक बड़े हिस्से को सब्जी मंडी के रूप में उपयोग करने से वह मैदान सिकुड़ सा गया है. खाली बचे मैदान के हिस्से में आये दिन मीना बाजार या अन्य प्रकार के व्यावसायिक कार्य किये जाने से वह मैदान खाली रहने की स्थिति में नहीं है. दानापुर छावनी के मालिकाना वाले उक्त पड़ाव मैदान का इतिहास काफी ऐतिहासिक रहा है, लेकिन वर्तमान में खिलाड़ियों के लिए काफी दुखदायी है. शहर के डालयिमानगर इलाके में स्थित खेल मैदान व झंडा चौक मैदानों की स्थिति भी कुछ खास ठीक नहीं है. डालयिमानगर खेल मैदान की हालत कुछ हद तक इस लिए ठीक है कि वहां हर समय कोई न कोई खेल की गतिविधि होती रहती है. चारों तरफ से खुले उक्त मैदान में वाहनों के प्रवेश व अन्य प्रकार की गतिविधि के कारण अधिकतर हिस्सा काफी ऊंचा-नीचा हो गया है. इस कारण खिलाड़ियों को खेलते समय चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है. उक्त मैदान से सटे झंडा चौक मैदान की स्थिति तो काफी दयनीय है.
पहले राष्ट्रीयस्तर के होते थे आयोजन:
रोहतास उद्योग समूह के चालू रहने के समय डालयिमानगर खेल मैदान में राष्ट्रीय स्तर की टीमें फुटबॉल व क्रिकेट मैचों में हिस्सा लेने आती थी. उन मैचों के आयोजक उद्योग समूह हुआ करता था. इसी प्रकार डेहरी पड़ाव मैदान में भी मैचों का आयोजन होता था. उन आयोजनों की ही देन थी कि इस शहर से टेका, महेश व दिलाई नामक करीब आधा दर्जन से अधिक राज्यस्तरीय फुटबॉलर निकले, परंतु 80 के दशक के बाद से आज तक कोई खिलाड़ी उस स्तर का नहीं निकला.
हो सकता है समाधान
शहर के युवाओं का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि व अधिकारी चाहें तो यहां के खिलाड़ियों के भाग्य को उज्जवल बना सकते हैं. थोड़ी सी मेहनत व लागत से शहर के उक्त दोनों महत्वपूर्ण मैदानों को स्टेडियम में बदला जा सकता है, जो राष्ट्रीय स्तर के हो सकते हैं. पड़ाव मैदान के लिए दानापुर छावनी व डालमियानगर खेल व झंडा चौक मैदान के लिए उच्च न्यायालय के लिक्विेडेटर से इजाजत ले कर स्टेडियम के निर्माण कराये जाने से यहां निखरे खेल प्रतिभा में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी काफी संख्या में देखने को मिलेंगे.
बोले अधिकारी
एसडीएम पंकज पटेल कहते हैं कि खेल प्रतिभाओं को सुविधा मुहैया कराने का प्रयास जारी है.
बोले लोग
शहर के निवासी मुन्ना कसेरा, पवन कुमार, संजय पासवान, विनोद पासवान आदि कहते हैं कि स्थानीय जन प्रतिनिधियों को उक्त दोनों खेल मैदानों को जनहित में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए. अधिकारियों को भी इसमें अपना पूर्ण सहयोग देना चाहिए.
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