नहीं थमी ओवरलोडिंग टूट रही हैं जिले की सड़कें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Dec 2016 8:15 AM (IST)
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सहरसा : सड़कों पर ओवरलोडिंग थम नहीं रही है. वाहनों में निर्धारित से ज्यादा लोड भर कर न सिर्फ नियमों को तार-तार किया जा रहा है, बल्कि इससे सड़कों की सेहत भी बिगड़ती जा रही है. माननीय न्यायालय से भी काफी पहले ओवरलोडिंग वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये गये थे. लेकिन सड़कों पर […]
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सहरसा : सड़कों पर ओवरलोडिंग थम नहीं रही है. वाहनों में निर्धारित से ज्यादा लोड भर कर न सिर्फ नियमों को तार-तार किया जा रहा है, बल्कि इससे सड़कों की सेहत भी बिगड़ती जा रही है. माननीय न्यायालय से भी काफी पहले ओवरलोडिंग वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये गये थे.
लेकिन सड़कों पर ओवरलोडिंग नहीं रुक रही है. कार्रवाई होती है, लेकिन यह बहुत कम है. अक्सर ऐसे ओवरलोड वाहन एनएच 107 पर फर्राटे भरते दिखाई देते हैं. ओवरलोड वाहनों से हादसों का तो खतरा होता ही है. सड़कें टूट जाती है. क्षमता से अधिक लोड भर कर चलने वाले वाहनों का सड़कों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. जाहिर है सड़कें दबाव झेल नहीं पातीं, और निर्माण के कुछ समय बाद ही टूटनी शुरू हो जाती है. ज्यादतर ट्रकों में ओवरलोडिंग होता है. क्षमता से अधिक सामान भरने के बाद ऐसे ट्रकों को तिरपाल से ढ़ंक लिया जाता है ताकि देखने भर से पता नहीं लग पाये कि ट्रक में आखिरकार भरा क्या है. जिले में सरकारी खाद्यान्न के उठाव में प्रयुक्त किये जाने वाले ट्रैक्टर पर धड़ल्ले से ओवरलोडिंग की जाती है.
स्कूल वाहन पर भी लगे लगाम: यातायात के नियम शहर में दो और चारपहिया वाहनों पर भी लागू हैं. स्कूल के बच्चों को भरकर लाने ले जाने वाले रिक्शा और ऑटो रिक्शा वालों को यातायात नियमों की अघोषित छूट प्रशासन ने दी है. ज्यादा रुपये कमाने के लालच में चालक बच्चों का जीवन संकट में डाल रहे हैं.
जिले में दो सौ से अधिक स्कूली वाहन: रिक्शा, ऑटो, टाटा मैजिक, मिनी बस मिला कर करीब दो सौ से अधिक वाहन प्रतिदिन बच्चों को स्कूल लाते ले जाते हैं. इनमें अधिकांश बच्चे छोटे ही होते हैं. जिनमें महज पचास वाहन स्कूलों के हैं. शेष किराये के चल रहे हैं. शहर में अधिकांश मार्ग संकरे हैं और इन मार्गों पर पैदल यात्री, साइकिल, रिक्शा, ऑटो रिक्शा, ट्रैक्टर, ट्रक, बस, दो पहिया वाहन एक साथ चलते हैं.
ऑटो मे होते हैं एक दर्जन से अधिक बच्चे: ऑटो में पांच से छह बच्चों के बैठने की सीट होती है, लेकिन चालक लालच में एक दर्जन से अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बिठा कर स्कूल पहुंचाया करते हैं. बच्चों से ठसाठस भरे ऑटो रोज मुख्य मार्ग व चौराहों से यातायात पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों के सामने से निकलते हैं. लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है.
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