पीओ बनना चाहती थीं नेहा व ज्योति

Published at :20 Nov 2016 4:16 AM (IST)
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पीओ बनना चाहती थीं नेहा व ज्योति

दुखद. पांच संतानों में दोनों बहनें ही थीं बड़ी बेटियों की इच्छा थी कि नौकरी पाकर पिता का बनेंगी सहारा सासाराम नगर : रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना की शिकार हुई नेहा व ज्योति पीओ बनना चाहती थी. दोनों सगी बहनें थी. ज्योति पार्ट टू व नेहा पार्ट वन की छात्रा थी. पिता राम प्रवेश सिंह […]

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दुखद. पांच संतानों में दोनों बहनें ही थीं बड़ी

बेटियों की इच्छा थी कि नौकरी पाकर पिता का बनेंगी सहारा
सासाराम नगर : रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना की शिकार हुई नेहा व ज्योति पीओ बनना चाहती थी. दोनों सगी बहनें थी. ज्योति पार्ट टू व नेहा पार्ट वन की छात्रा थी. पिता राम प्रवेश सिंह शहर के बौलिया मोड़ पर चाय की दुकान चलाते हैं. उनकी आमदनी कम है, मगर कुशल गृहिणी पत्नी अहिल्या के सहयोग से अपने पांचों संतानों को अच्छी शिक्षा दिला रहे हैं. पांचों में सबसे बड़ी दोनों बहने छोटे भाई बहनों को मार्गदर्शन भी देती थी. सुबकते हुए पिता ने कहा दोनों शुरू से ही पढ़ने में तेज थी. मैट्रिक में दोनों 90 प्रतिशत मार्क्स व इंटर में 70 प्रतिशत नंबर लायी थी. हमेशा रिश्तेदार व पड़ोसी कहा करते थे. राम प्रवेश आप की दोनों बेटियां एक दिन आपका नाम रोशन करेंगी. दोनों पढ़ाई के बाद घर के कामों में मां का हाथ बंटाती थी. मां कितना भी मना करें तो छोटी नेहा बोलती थी.
दीदी से पहले हम को नौकरी लेनी है. एक दिन मुझे पीओ बनना है. तो बड़ी ज्योति बोलती थी. हम दोनों को एक ही दिन नौकरी लेनी है. तब हम दोनों घर चलायेंगे. पापा को काम नहीं करने देंगे. आखिर हम दोनों बड़ी है, तो बेटी नहीं बेटा का फर्ज निभाना है. तब देखना कैसे सब को बाहर भेज कर पढ़ायेंगे. यह कर हर वह फुट-फुट कर रोने लगते है.
दो बेटियों की मौत से बेसुध हुई मां की हालत देखते ही लोगों का कलेजा फट जा रहा था़ दोनों की तस्वीर हाथ में ले कर नेहा व ज्योति का रट लगाते लगाते बेहोश हो जा रही थी. फिर दो मिनट बाद वहीं स्थिति हो जाती है. राम प्रवेश सिंह पांच बच्चों के पिता है. इसमें सबसे बड़ी ज्योति (20), नेहा (18), पवन कुमार (16), अर्चना (14) व प्रिंस (12) सभी कुशाग्र बुद्धि के पढ़ने में तेज तर्रार है़ इस हादसे के बाद अपनी दो बहनों को खो चुका पवन रोते हुए कभी घर के अंदर तो कभी घर के बाहर किसी से लिपट कर रोने लगता है. पागलों जैसी स्थिति हो गयी है. इसकी छोटी बहन अर्चना की आंखों का आंसू सूख गया है. वह सभी के चेहरों को निहार रही है.
छोटा भाई प्रिंस पापा से लिपट कर रोते देखा गया. पड़ोसी बब्लू सिंह ने कहा कि मैं दोनों लड़कियों का मुरीद था. दोनों संस्कार से ओत-प्रोत थी़
चाय की दुकान चला कर रामप्रवेश बच्चों को पूरी करा रहे उच्च शिक्षा
घटनास्थल पर जांच करते पुलिसकर्मी.
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