बढ़ रही बोनफिक्स सूंघने की लत

Updated at : 06 Sep 2016 6:52 AM (IST)
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बढ़ रही बोनफिक्स सूंघने की लत

शराब, गांजा व हेरोइन से भी अधिक खतरनाक है यह नशा सासाराम(नगर) : शहर में इन दिनों किशोरों में एक अलग तरह के नशे की लत बढ़ती जा रही है़ यह नशा शराब, गांजा व हेरोइन से भी अधिक खतरनाक है़ बच्चे हर जगह आसानी से मिलने वाले बोनफिक्स को प्लास्टिक के माध्यम से सूंध […]

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शराब, गांजा व हेरोइन से भी अधिक खतरनाक है यह नशा

सासाराम(नगर) : शहर में इन दिनों किशोरों में एक अलग तरह के नशे की लत बढ़ती जा रही है़ यह नशा शराब, गांजा व हेरोइन से भी अधिक खतरनाक है़ बच्चे हर जगह आसानी से मिलने वाले बोनफिक्स को प्लास्टिक के माध्यम से सूंध रहे हैं. इस नशे की चपेट में 10 से 15 वर्ष के बच्चे अधिक हैं.

ये बच्चे बोनफिक्स का एक पॉकेट खरीद कर कहीं अकेले में बैठ कर प्लास्टिक के पन्नी पर उसे पहले निचोड़ देते हैं. उसके बाद हथेली में बंद कर जोर लगा सूघंते हैं. सूंघने के पांच मिनट बाद उन पर नशा हावी होने लगता है. इसका नशा चार से पांच घंटे तक रहता है. नशा टूटने पर वे वहीं प्रक्रिया दोहराते है. इस तरह दिन में दो बार और कभी कभी शाम में भी इस का एक डोज लेते हैं. यह नशा शरीर को सुन्न कर देता है.

यह होता है असर: नशा करने के बाद किशोर कही भी घंटों शांत बैठे रहते हैं. चार-पांच बच्चे अगर एक जगह बैठे भी हैं, तो आपस में बात तक नहीं करते हैं. खुद में सिमटे रहते हैं. इसी नशे का आदि एक बच्चे को विश्वास में ले कर पूछने पर बताया कि सुंघने के बाद शरीर हलका हो जाता है. रंग बिरंगी तसवीर नजर आती है. बोलने का मन नहीं करता है. मन करता है कि कहीं अकेले बैठे रहें. हेरोइन व गांजे की नशे की तरह इस का नशा होता है. यह नशा सेवन करने वाले को शिथिल कर देता है. सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है. किसी से बात करने का मन नहीं करेगा.

कई जगह जुटते हैं इसके आदी

पोस्टल काॅलोनी फजलगंज निवासी सनोज कुमार ने बताया कि इसकी गिरफ्त में उसका भाई भी आ गया था. जानकारी होने पर उसका इलाज कराया गया. हालांकि, हमेशा उस पर नजर रखी जाती है. इस नशे के शिकार कम उम्र के बच्चे हैं. यह कहीं भी किराना व स्टेशनरी की दुकान पर मिल जाता है. मेरा भाई शहर के अच्छे विद्यालय में पढ़ता है. कक्षा छह का छात्र है.

उसके स्कूल के बैग में हमेशा बोनफिक्स का पॉकेट रहता था. जानकारी नहीं थी. इस लिए शक नहीं होता था. जब उसकी तबीयत खराब हुई, तो इलाज के दौरान डॉक्टर ने बताया कि यह कोई नशा करता है. पता करने पर इसकी जानकारी हुई कि वह बोनफिक्स सुंघता है. यकह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ. पूछताछ करने पर पता चला कि इसका ग्रुप न्यू स्टेडियम फजलगंज, मकबरा पार्क, रौजा व स्टेशन के आस-पास जुट कर इसका सेवन करते हैं. कहीं, लगातार इनकी बैठक नहीं होती है.

हर्ट व फेफड़े पर पड़ता है असर

इस नशे के सेवन से हर्ट व फेफड़े पर जबरदस्त असर पड़ता है. लगातार सेवन करने से जान भी जा सकती है.सदर अस्पताल के डॉ विनय कुमार तिवारी ने बताया कि बोनफिक्स या सनफिक्स में रसायनिक तत्व होता है. बच्चे नशे के लिए जोर से सुघंते है. इससे रसायनिक तत्व सीधे फेफड़े में जाती है. लगातार सेवन से वही रसायनिक तत्व पानी में तब्दील हो जाता है. फेफड़े में सूजन आ जाती है व हर्ट पर इसका सीधा दुष्प्रभाव होता है. समय पर इस का इलाज नहीं हुआ तो मौत भी हो सकती है.

बच्चों पर नजर रखें अभिभावक

बहुत दुःख की बात है कि हमारे बच्चे इस तरह के खतरनाक नशे के आदी होकर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. पुलिस ऐसे ठिकानों का पता लगा कर कार्रवाई करेगी. पुलिस अभिभावकों से अपील करती है कि अपने बच्चों पर नजर रखें. बच्चे भी नादान है. उनको सही गलत की समझ नहीं है.

पवन कुमार, नगर थानाध्यक्ष, सासाराम

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