क्रॉस रेगुलेटर का निर्माण बंद

Published at :14 Apr 2015 6:28 AM (IST)
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क्रॉस रेगुलेटर का निर्माण बंद

पश्चिमी सोन नहर के पानी को रोक कर बिजली उत्पादन पर लगा ग्रहण ठेकेदार को नहीं हुआ है बकाया रुपये का भुगतान बीएचपीसी को हर हो रहा एक लाख 99 हजार रुपये का नुकसान डेहरी ऑन सोन (रोहतास) : शहर में पश्चिमी सोन नहर कैनाल के पानी को रोक कर बिजली उत्पादन करने की नियमित […]

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पश्चिमी सोन नहर के पानी को रोक कर बिजली उत्पादन पर लगा ग्रहण
ठेकेदार को नहीं हुआ है बकाया रुपये का भुगतान
बीएचपीसी को हर हो रहा एक लाख 99 हजार रुपये का नुकसान
डेहरी ऑन सोन (रोहतास) : शहर में पश्चिमी सोन नहर कैनाल के पानी को रोक कर बिजली उत्पादन करने की नियमित प्रक्रिया पर करोड़ों खर्च के बावजूद ग्रहण लगा हुआ है. बिहार स्टेट हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड शक्ति गृह के पास करीब छह करोड़ 50 लाख की लागत से क्रॉस रेगुलेटर का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका काम पिछले वर्ष के मई-जून से ही बंद है. इसका मुख्य कारण ठेकेदार का भुगतान बकाया बताया जा रहा है.
वहीं, विभाग के अधिकारी इसे ठेकेदार की लापरवाही बताते नहीं थकते हैं. 2011-12 में शुरू हुई इस परियोजना को 2014 में पूरा हो जाना था और इससे हाइड्रो पावर लिमिटेड को नियमित जरूरत के मुताबिक पानी मिलना भी शुरू हो जाता है. इससे बिजली उत्पादन पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है. विभागीय सूत्रों की मानें तो परियोजना के पूरा नहीं होने से बीएचपीसी को प्रतिदिन एक लाख 99 हजार का नुकसान हो रहा है.
क्या थी योजना : पश्चिमी सोन नहर के पानी को रोक कर बिहार स्टेट हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के हदहदवा पुल के पास स्थित शक्तिगृह को साल भर पानी उपलब्ध कराने के लिए क्रॉस रेगुलेटर का निर्माण करना था. यह इसलिए कि नहर में साल भर पानी पटवन के लिए नहीं छोड़ा जाता है.
ऐसे में बिजली उत्पादन ठप रहता है. बिजली उत्पादन के लिए साल भर पानी मिलते रहे, इसके लिए पानी को रोक कर बीएचपीसी को उपलब्ध कराना है. बिजली उत्पादन करने वाले शक्तिगृह की क्षमता 4×1.65 मेगावाट की है. क्रॉस रेगुलेटर निर्माण की जिम्मेदारी रांची की कंपनी पारी पावर के पास है, जिसमें पिछले कई माह से काम बंद कर रखी है.
उत्पादन पर बिजली बोर्ड को होती है सप्लाइ
बीएचपीसी कैनालों में कई जगहों पर बिजली का उत्पादन किया जाता है. इसे बिजली को बिजली बोर्ड को बेच दिया जाता है. शहर में हाइड्रो पावर से उत्पादित बिजली की 2.49 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जाती है. खरीद के बाद बिजली बोर्ड जरूरतमंदों तक बिजली पहुंचाता है.
ठेकेदार को काम करने का निर्देश
बिहार स्टेट हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के कनीय अभियंता कृष्णा कुमार तिवारी ने बताया कि मई-जून, 2014 से ठेकेदार ने काम बंद कर रखा है. पानी को रोकने व डिस्चार्ज के लिए दो गेट बन रहे हैं. 60 से 70 प्रतिशत काम हुआ है. चैनल को एप्रोच कैनाल में जोड़ना है और गेट लगाना बाकी है. सक्षम पदाधिकारी के नहीं रहने की वजह से ठेकेदार के बिल के भुगतान में थोड़ी विलंब हुई है. लेकिन, अब समस्या दूर हो हो गयी है. ठेकेदार को सक्षम पदाधिकारी द्वारा काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है.
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