होमगार्ड बुझा रहे आग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Feb 2015 12:45 AM (IST)
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होमगार्डो को नहीं दी गयी है आग बुझाने की विशेष ट्रेनिंग सासाराम (ग्रामीण) : अग्निशमन विभाग में कार्यरत जवान प्रशिक्षित होते हैं. उन्हें आग बुझाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. लेकिन, रोहतास जिले में अग्निशमन विभाग की कमान अप्रशिक्षित होमगार्ड के जवानों के हाथों में है, जिन्हें आग बुझाने की ट्रेनिंग प्राप्त नहीं की […]
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होमगार्डो को नहीं दी गयी है आग बुझाने की विशेष ट्रेनिंग
सासाराम (ग्रामीण) : अग्निशमन विभाग में कार्यरत जवान प्रशिक्षित होते हैं. उन्हें आग बुझाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. लेकिन, रोहतास जिले में अग्निशमन विभाग की कमान अप्रशिक्षित होमगार्ड के जवानों के हाथों में है, जिन्हें आग बुझाने की ट्रेनिंग प्राप्त नहीं की है.
वह आग लगने की सूचना मिलते ही निष्क्रिय हो जाते हैं. उधर, अग्निशमन विभाग कई संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. विभाग के कार्यालय में पांच वाहन खड़े हैं, जिनमें से महज दो वाहन ही चलने के लायक हैं. लेकिन, इन दो वाहनों में भी एक की हालत जजर्र है. विभाग में वर्षो से अधिकारियों व कर्मचारियों का घोर अभाव है. दमकलों को पानी भरने के लिए 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. पानी लाने में विभाग को पांच सौ रुपये का नुकसान होता है.
ठप है आपातकालीन कॉल सेवा
जिला अग्निशमन विभाग, रोहतास, का टॉल फ्री नंबर 101 इन दिनों बंद है. यह आपातकालीन नंबर किस कारण बंद है, विभाग के अधिकारी बताने से परहेज करते हैं. दो दिन पहले विभाग ने बंद पड़े लैंडलाइन नंबर (टेलीफोन नंबर) 0684-223514 चालू कराया है, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हो सका है. ऐसे में विभाग को आग लगने की सूचना आखिर कैसे मिलेगी.
बोर से नहीं निकला पानी: गत वर्ष विभाग के कार्यालय परिसर में बोर हुआ था, लेकिन उससे पानी नहीं निकला. हजारों रुपये खर्च हो गये. फिलहाल, दमकलों में शिवसागर व जमुहार से, यानी 12 किलोमीटर दूर, पानी भरे जाते हैं. ऐसी स्थिति में लगभग 500 रुपये का डीजल जल जाता है. लेकिन, विभाग ने पुन: बोर को नहीं चालू कराया है. इससे हजारों रुपये की क्षति विभाग को हो रही है.
दमकलों की हालत भी खराब: अग्निशमन विभाग के कार्यालय में कुल पांच गाड़ियां खड़ी हैं. इनमें तीन गाड़ियां चलने लायक नहीं है. शेष दो गाड़ियों में से एक चंद दिनों पूर्व ठीक करायी गयी थी. गाड़ियां कबाड़ में बेचे जाने लायक हो चुकी हैं. खराब पड़ी गाड़ियां सड़ रही हैं. कार्यालय परिसर में पानी जमा है. इन्हीं सब के बीच विभाग के अधिकारी व कर्मचारी रहने व काम करने पर मजबूर हैं.
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