फिर रोहतासगढ़ किला व रौजा के विकास की जगी आस

Updated at : 21 Aug 2018 3:53 AM (IST)
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फिर रोहतासगढ़ किला व रौजा के विकास की जगी आस

छह वर्षों में दो बार मुख्यमंत्री व दो राज्यपाल कर चुके हैं दीदार सासाराम कार्यालय : शंका-आशंकाओं के बीच एक बार फिर जिले में धरोहर के रूप में प्रसिद्ध रोहतास गढ़ किला व शेरशाह सूरी मकबरे के विकास की उम्मीद जगी है. लेकिन, थोड़ी आशंका इस बात की कि आखिर कब तक विकास होगा. क्योंकि, […]

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छह वर्षों में दो बार मुख्यमंत्री व दो राज्यपाल कर चुके हैं दीदार

सासाराम कार्यालय : शंका-आशंकाओं के बीच एक बार फिर जिले में धरोहर के रूप में प्रसिद्ध रोहतास गढ़ किला व शेरशाह सूरी मकबरे के विकास की उम्मीद जगी है. लेकिन, थोड़ी आशंका इस बात की कि आखिर कब तक विकास होगा. क्योंकि, 2012 से अब तक मुख्यमंत्री व दो राज्यपाल रोहतासगढ़ किले का अवलोकन कर चुके हैं. वहीं, इन छह वर्षों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं दो बार पहाड़ी पर आ चुके हैं. इस दौरान विकास को लेकर कई घोषणाएं हुई, पर किले के विकास के नाम पर कुछ दिखायी नहीं देता. रविवार को भी राज्यपाल सत्यपाल मलिक किला को देखने पहुंचे.
वह किले की भव्यता देख मंत्रमुग्ध थे. हालांकि, वहां कुव्यवस्था देख चिंतित भी दिखे. उन्होंने कहा भी कि किले की देखरेख सही नहीं है. किले के परिसर में घास उग आयी है.
चारों ओर गंदगी है. आने-जाने का मार्ग नहीं है. लगभग इसी तरह की बातें पूर्व के राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविद भी 2 फरवरी, 2017 को अपने दौरा के दौरान कहे थे. लेकिन, अब तक कुछ होता दिखाई नहीं पड़ा है.
विकास की कई घोषणाएं, पर अमल अब तक नहीं
रोप-वे : 2013 में हुआ सर्वे, पर काम अब तक नहीं
मुख्यमंत्री जब 2012 में किला में पहुंचे थे, तो उस समय किला तक पहुंचने के लिए रोप-वे के निर्माण की बात कही थी. उसके बाद 2013 में राज्य सरकार की एक टीम रोप-वे के लिए सर्वे करने यहां पहुंची थी. इसके बाद योजना किस स्तर तक पहुंची? है भी या नहीं शायद किसी को पता नहीं. तभी तो इससे जुड़े अधिकारी योजना की डीपीआर बनने की बात कह पल्ला झाड़ लेते हैं. इसी वर्ष 30 अप्रैल, 2018 को एक फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किले से कुछ किलोमीटर दूर रेहल गांव पहुंचे, तो लोगों में उम्मीद जगी कि इस बार तो जरूर किले तक पहुंचने के लिए रोप-वे निर्माण का काम शुरू होगा. लेकिन, साढ़े तीन माह बीत गये,
कुछ सुगबुगाहट नजर नहीं आयी. अब राज्यपाल आये और फिर सर्दी के मौसम में आने की बात कही है, तो वनवासियों सहित जिलेवासियों में किले के जीर्णोद्धार व रोप-वे निर्माण की आस जगी है. इसके पीछे तर्क है कि राज्यपाल स्वयं राज्य के पर्यटन स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं. ऐसे में उनसे उम्मीद की जा सकती है कि रोहतासगढ़ किला और शेरशाह सूरी मकबरा के दिन बहुरेंगे. लेकिन, लोगों की आशंकाएं तभी दूर होंगी, जब जीर्णोद्धार के साथ विकास लिए काम लगे. नहीं तो राज्य के शीर्षस्थ लोगों के आगमन को लोग तफरीह ही मानते रहेंगे.
एलइडी की रोशनी से जगमग होंगी ऐतिहासिक व पुरातात्विक इमारतें
रोहतासगढ़ किला, शेरशाह सूरी का मकबरा, हसन खां सूर का मकबरा, अलावल खां का मकबरा, सम्राट अशोक का लघु शिलालेख मां ताराचंडी धाम परिसर स्थित तीन शिलालेख
सरकार के निर्देशानुसार ही होगा काम
नगर पर्षद की कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी ने कहा कि शहर में एलइडी लाइट लगाने के लिए सर्वे का काम हो रहा है. इसमें शहर की ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को पहले से ही शामिल किया जा चुका है. रही बात रोहतासगढ़ किला, अलावल खां का मकबरा व मां ताराचंडी धाम के समीप लाइट लगाने की तो, इसके लिए सरकार से पत्राचार किया जायेगा. हालांकि, अब तक मुझे नगर विकास विभाग का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. सरकार के निदेशानुसार ही काम होगा.
नीलकोठी मुहल्ले में हर समय होती है छिनतई
पुरानी गली के रूप में जाने जाने वाले बनारसी लाल गली मैं नप द्वारा प्रकाश की व्यवस्था का नहीं कराया जाना वार्ड नंबर 30 , 31 व अन्य वार्डों के रहने वाले लोगो के लिए अभिशाप सा बन गया है.
दानिश खान
थाने से दूरी कम, फिर भी पीड़ितों की थाने से बनी रहती है दूरी
थाने से महज कुछ दूरी तय करनेवाली उक्त सड़क पर अंधेरे का लाभ उठा कर चोरी व छिनतई की घटनाएं घट चुकी है. मोहल्ले के लोग बताते हैं कि हाल फिलहाल के दिनों में उक्त गली में चेन स्नेकरों द्वारा कई महिलाओं के गले से चेन खींचकर बाइक से भागने की घटना घट चुकी है. हालांकि, इन घटनाओं के संबंध में संबंधित थाने में कोई मामला दर्ज कराया गया है या नहीं इस संबंध में लोग कुछ बता नहीं पाते. उक्त सड़क पर वार्ड 31 में पड़ने वाले रोहतास फर्नीचर व डॉ बजाज के सामने स्ट्रीट लाइट जलता है. वार्ड 30 में अतहर इमाम के घर के पास भी स्ट्रीट लाइट जलता है लेकिन सड़क के बाकी हिस्से अंधेरे में डूबे होने के कारण असामाजिक तत्वों के लिए एक सुरक्षित सड़क के रूप में अब उक्त सड़क अपनी पहचान बनाने लगा है. लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस प्रशासन को वैसे गलियों में पैदल पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था करानी चाहिए, ताकि असामाजिक तत्वों के लिए ऐसी गलियां सुरक्षित न रह पाये.
क्या कहते हैं लोग
बनारसी लाल गली व उसके आसपास कि अन्य गलियों में पुलिस प्रशासन द्वारा शाम होने के बाद पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि छिनैती व अन्य घटनाओं पर रोक लगायी जा सके.
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