हाथ को नहीं मिल रहा काम खाली पेट ही बीत रहा दिन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Aug 2017 10:05 AM (IST)
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बेरोजगारी. गिट्टी-बालू बंद होने से मजदूरों का छिन गया काम छड़ व सीमेंट की बिक्री 70 प्रतिशत तक घटी शहर में भवन िनर्माण का काम भी हुआ बंद सासाराम नगर : गिट्टी व बालू नहीं मिलने से मकान निर्माण का काम लगभग बंद हो गया है. इस कार्य से जुड़े मजदूर भुखमरी के कगार पर […]
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बेरोजगारी. गिट्टी-बालू बंद होने से मजदूरों का छिन गया काम
छड़ व सीमेंट की बिक्री 70 प्रतिशत तक घटी
शहर में भवन िनर्माण का काम भी हुआ बंद
सासाराम नगर : गिट्टी व बालू नहीं मिलने से मकान निर्माण का काम लगभग बंद हो गया है. इस कार्य से जुड़े मजदूर भुखमरी के कगार पर है. प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मजदूर शहर में आते है. यहां काम नहीं मिलने पर निराश होकर लौट जाते हैं.
अब इनको परिवार चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मजदूरों का कहना है कि एक-एक सप्ताह काम नहीं मिल रहा है़ रोज शहर आ रहे हैं. दिन भर भटकने के बाद शाम घर पहुंचने पर खाली हाथ देख कर पत्नी व बच्चे कहते हैं कि आज भी काम नहीं मिला, उस समय गरीबी का अहसास होता है़ बड़े व अमीर लोग इस दर्द को क्या समझेंगे़ इधर, छड़ व सीमेंट के व्यवसायियों की चिंता भी बढ़ गयी है. गिट्टी व बालू पर प्रतिबंध से इनका व्यवसाय भी काफी प्रभावित हुआ है.
छड़ व सीमेंट कि बिक्री 70 प्रतिशत तक कम हो गयी है. गिट्टी व बालू चोरी छिपे लायी जा रही है. व्यवसायी मनमाने दाम पर बेच रहे हैं. इससे आम लोगों कि परेशानी बढ़ गयी है. प्रशासन ने गिट्टी को पहले ही अवैध घोषित कर दिया है. हाल के दिनों में सोन नदी से बालू निकासी पर रोक लग गयी है. आलम यह है कि शहर में कई मकानों के निर्माण कार्य ठप हो गया है.
मजदूर हो गये बेरोजगार
रोहतास जिले में पत्थर, बालू व कृषि यही तीन मुख्य व्यवसाय है. वर्ष 2009 से पत्थर खनन पर प्रशासन ने रोक लगा दी. खनन बंद होते ही हजारों मजदूर बेरोजगार हो गये और खुद को दूसरे कामों में एडजस्ट करने में जुट गये.
खनन बंद होने पर कई महिनों तक तो उन्हें बेरोजगारी में जिंदगी गुजारनी पड़ी. सैकड़ों मजदूर रोजी-रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर गये. जो बचे वह इधर-उधर जुगाड़ लगाये. इधर, एक जुलाई से बालू खनन पर भी रोक लग गयी. बालू पर प्रतिबंध से मजदूरों में बेचैनी बढ़ गयी है. विडंबना है कि रोजगार समाप्त होने पर मजदूरों के बारे में किसी ने नहीं सोचा. सभी नियम कानून की दुहाई दे रहे है.
रोक के बाद भी सोन नद से चोरी छिपे बालू का खनन हो रहा है. इसे व्यवसायी दोगुने-तीगुने दाम पर बेच रहे है. यही स्थिति गिट्टी का भी है. पत्थर व्यवसायी झारखंड से गिट्टी लाकर शहर में बेच रहे है. इसकी कीमत सभी नहीं दे सकते, दूसरी बात है कि झारखंड कि गिट्टी कि गुणवत्ता अच्छी नहीं होती. फिर भी लोग मजबूरी में ऊंचे दामों पर गिट्टी खरीद कर मकान बनाने के बाद भी संतुष्ट नहीं होते. गिट्टी व बालू बंद होने से बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इसका असर अन्य व्यवसाय पर दिखने लगा है.
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