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बिहार में 33 लाख राशन कार्ड होंगे रद्द, अब अयोग्य लाभार्थी पर होगी कार्रवाई

Updated at : 16 Feb 2026 8:11 AM (IST)
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Ration Card Cancelled

Ration Card Cancelled

Ration Card Cancelled: बिहार में जन वितरण प्रणाली की सूची का बड़े पैमाने पर सत्यापन किया गया है. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 33 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों को अयोग्य मानते हुए सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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Ration Card Cancelled: बिहार में राशन कार्डधारियों पर सरकार की सख्ती बढ़ गई है. सत्यापन अभियान के बाद लाखों अयोग्य लाभार्थी के नाम हटाने की तैयारी है. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाते हुए करीब 33 लाख 25 हजार कार्डधारियों के नाम काटने की तैयारी पूरी कर ली है.

यह कदम उन लोगों के खिलाफ उठाया गया है जो संपन्न होने के बावजूद गरीबों के हक का अनाज ले रहे थे.

जांच में सामने आये लाखों अयोग्य लाभार्थी

बिहार में चल रहे राशन कार्ड सत्यापन अभियान के दौरान 33 लाख 25 हजार राशन कार्डधारियों को संदिग्ध सूची में रखा गया है. इनमें से करीब 4.70 लाख लोगों के नाम पहले ही काटे जा चुके हैं, जबकि बाकी नाम हटाने के लिए जिलों को दिशा-निर्देश भेजे गये हैं. यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी.

केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई 57 लाख संदिग्धों की सूची के बाद बिहार सरकार ने गहन जांच अभियान चलाया है. जांच में सामने आया है कि कई कार्डधारी ऐसे हैं जिनके पास अपना चारपहिया वाहन है, वे आयकर (Income Tax) भरते हैं या फिर किसी बड़ी कंपनी में ऊंचे पदों पर आसीन हैं.

विभाग के अनुसार, कई महीनों से राशन का उठाव न करने वाले साइलेंट कार्डधारकों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल किए गए हैं. अब तक 51 लाख लोगों की जांच पूरी हो चुकी है, जिनमें से 4.70 लाख के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं.

किन लोगों पर गिरी गाज

सरकार के अनुसार जिन लोगों के पास चारपहिया वाहन है, जो आयकर दाता हैं, किसी कंपनी के निदेशक हैं या लंबे समय से राशन नहीं उठा रहे थे, उन्हें राशन कार्ड के लिए अयोग्य माना गया है.

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग पीडीएस के मानकों पर खरे नहीं उतरते, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. विभाग संदिग्धों को नोटिस भेज रहा है और यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उनका नाम तुरंत पोर्टल से हटा दिया जाएगा.

पात्र परिवारों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि साथ ही साथ नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी जारी है ताकि किसी जरूरतमंद का हक न मारा जाए.

कई जिलों में सबसे ज्यादा नाम हटेंगे

इस डिजिटल सफाई का सबसे बड़ा असर गया और पटना जिले में देखने को मिला है. आंकड़ों के मुताबिक, सर्वाधिक 1.92 लाख नाम गया जिले से काटे जाएंगे, जबकि राजधानी पटना में 1.83 लाख कार्डधारियों की छुट्टी होने वाली है. इसके अलावा सीवान, भागलपुर और चंपारण जैसे जिलों में भी एक-एक लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम हटाए जा रहे हैं.

विभाग का लक्ष्य है कि फर्जीवाड़ा रोककर उन वास्तविक गरीब परिवारों को जोड़ा जाए जो अभी भी इस योजना से वंचित हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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