अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार की मांग, संस्थाओं को कमजोर करना देशहित में नहीं : सांसद

Updated at : 05 Apr 2026 6:54 PM (IST)
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अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार की मांग, संस्थाओं को कमजोर करना देशहित में नहीं : सांसद

पूर्णिया

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पूर्णिया. सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने अग्निवीर योजना और विभिन्न संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े फैसलों में व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है.उन्होंने कहा कि सेना का मनोबल देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि सैनिकों के भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा होती है, तो इसका असर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है. उन्होंने मांग किया कि अग्निवीर योजना को लेकर सरकार स्पष्ट नीति सामने रखे और जरूरत पड़े तो इसे उच्च स्तरीय समिति के पास भेजा जाए.सांसद पप्पू यादव ने कहा कि देश का हर युवा सेना में सम्मानजनक और स्थायी अवसर चाहता है, ताकि वह अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य दे सके. उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा बनी रहेगी, तो सैनिकों के आत्मसम्मान और मनोबल पर असर पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सेना और अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के जवानों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी के लिए समान सम्मान और सुरक्षा की नीति सुनिश्चित की जानी चाहिए.उन्होंने पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने कई बहादुर जवानों को खोया, लेकिन उससे जुड़े कई सवाल अब भी स्पष्ट नहीं किये गये हैं. उन्होंने मांग किया कि शहीदों के सम्मान और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शहीद परिवारों को दी जाने वाली सहायता, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की जानकारी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास मजबूत हो.सांसद पप्पू यादव ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखना आवश्यक है. उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार नए विधेयकों के माध्यम से संस्थाओं पर दबाव बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायपालिका का सम्मान लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है और सरकार को टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए.उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय व्यापक विचार-विमर्श के लिए उच्च स्तरीय समिति को भेजा जाना चाहिए.

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