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वासंतीय चैत्र नवरात्र कल से, तेज हुई पूजन-अनुष्ठान की तैयारी

Updated at : 28 Mar 2025 5:46 PM (IST)
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वासंतीय चैत्र नवरात्र कल से, तेज हुई पूजन-अनुष्ठान की तैयारी

तेज हुई पूजन-अनुष्ठान की तैयारी

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पूर्णिया. वासंतिक नवरात्र की शुरुआत रविवार 30 मार्च से होगी. रविवार को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा देवी के उपासना का अनुष्ठान शुरू हो जाएगा. इसको लेकर सभी पूजा स्थलों पर तैयारी तेज कर दी गई है. पर्व के दौरान होने वाली शक्ति स्वरूपा देवियों की पूजा को लेकर देवी मंदिरों में साज सज्जा व विद्युत रोशनी की तैयारी को अब फाइनल टच दिये जाने की कवायद हो रही है. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना यानी कलश की स्थापना की जाती है. कलश स्थापना के दौरान मुहूर्त का खास ख्याल रखा जाता है. नवरात्र के पहले दिन हिदू नववर्ष विक्रम नवसंवत्सर भी शुरू हो जाएगा.

पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा

रविवार को मंदिरों में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी. यह देवी मनवांछित फल देने वाली हैं, सुबह मंत्रोच्चार के साथ मंदिरों में आस्था की ज्योति जलनी प्रारंभ हो जाएगी. शहर के गुलाबबाग सुनौली चौक व मिशन परिसर में चैत्र नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां चल रही हैं. हर साल की तरह इस बार भी इन मंदिरों में आस्था की ज्योति जगमगाएगी.

क्या है मान्यता

यह मान्यता है कि नवरात्र में प्रतिदिन यथा सामर्थ कम से कम एक कंजक का पूजन अवश्य करना चाहिए. इससे विशेष फल प्राप्त होता है. नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की परंपरा सनातन काल से चली आ रही है, इन बीच पवित्रता और शुद्धि का विशेष ध्यान रखा जाता है. मान्यता है कि इन नियमों के विधि पूर्वक पालन और श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से देवी दुर्गा की कृपा से साधकों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इससे जीवन और घर में नकारात्मक उर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होता है.

नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से वासंतिक नवरात्र का आरंभ होता है. प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है. चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है. वैसे,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को सायंकाल चार बजकर 33 मिनट पर लगेगी जो 30 मार्च को दिन में दो बजकर 14 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि की मान्यता के कारण 30 को कलश की स्थापना होगी. पंडितों की मानें तो नवरात्रि के पहले दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लगभग 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कलश स्थापना की जा सकती है. हालांकि दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. इस शुभ मुहूर्त में भी घटस्थापना और नवरात्रि की पूजा का शुभारंभ हो सकता है.

शहर के बाजारों में भी है तैयारी

नवरात्र के लिए शहर भर के बाजारों में दुकानदारों ने भी पहले से तैयारियां कर रखी हैं. चूनरी, पोशाक व अन्य सामान की खरीदारी के लिए बाजार गुलजार हो गए हैं. श्रद्धालुगण फूल की माला, आम पत्ते, पान, सुपारी, लौंग, बतासा, हल्दी गांठ, पिसी हल्दी, मौली, रोली, कमल गट्टा, शहद, चीनी, पंचमेवा, गंगाजल, नौवैद्ध, जावित्री, जटा नारियल, सूखा नारियल, दूध, वस्त्र, दीपक, घी व अगरबत्ती, मुकुट, व तस्वीर की खरीदारी कर रहे हैं. बाजारों में बिक रहे फल व मेवा के दामों में भी उछाल देखने को मिल रहा है. इधर फलों का बाजार भी सज गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH CHANDRA

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By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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