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आशा बनायेगी आभा कार्ड तो अस्पताल में नहीं लगानी होगी कतार

Updated at : 16 Nov 2024 5:46 PM (IST)
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आभा कार्ड

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प्रतिनिधि, अमौर. आशा व आशा फैसिलिटेटर को डिजिटल मोड में लाने के उद्देश्य से अमौर रेफरल अस्पताल में एम-आशा ऐप का तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एहतमामुल हक ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उदेश्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को एम-आशा ऐप के माध्यम से उनको पोषक क्षेत्र के सभी लाभार्थियों का डाटा सटीक रूप से कैप्चर करना है और डिजिटल माध्यम से इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाना है. प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक बीसीएम मुकेश कुमार ने बताया कि आशा कर्मियों को अपने संबंधित क्षेत्र में दंपति, गर्भवती महिलाएं एवं बच्चों का सर्वे कर आशा ऐप पर अपलोड करना है जिससे ससमय दंपति, गर्भवती महिलाएं एवं बच्चों को दवा खिलायी जा सके. इसके तहत आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड सहित अन्य दवा उपलब्ध करायी जाती है. आशा ऐप पर सर्वे कर अपलोड किए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति का आभा कार्ड बन जाता है जो बारकोड के रूप में होता है. जिस व्यक्ति का आभा कार्ड बन जाता है वह व्यक्ति किसी भी सरकारी चिकित्सालय में आभा ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा ले सकता है. उसे कतार में लगने की जरूरत नहीं है. आभा ऐप के माध्यम से बारकोड को स्कैन करने पर आपको यह पता चल जाएगा कि किस कक्ष में किस डॉक्टर के द्वारा और कितने बजे आपको देखा जायेगा. आशा कर्मियों को अपने संबंधित क्षेत्र में सर्वे कर दंपति, गर्भवती महिलाएं एवं बच्चों का आभा कार्ड बनाने के बाद ही इन्हें प्रोत्साहन राशि मिल पाएगी. आशा कार्यकर्ता अब मोबाइल फोन के जरिए एम-आशा ऐप के माध्यम से अलग अलग कार्यों, बीमारीयों पर खोज समेत अन्य कार्यों को सीधे पोर्टल पर खुद ही अपलोड कर सकेंगी. कार्यक्रम में जिला सामुदायिक उत्प्रेरक दीपक कुमार व संजय कुमार दिनकर ने बताया कि अब एम-आशा ऐप से आशा गांव में होने वाली वाली जन्म, मृत्यु, प्रसव,फाइलेरिया, मलेरिया, एईएस, बुखार, डायरिया समेत सभी प्रकार की बीमारी समेत अन्य गतिविधियों को इस डिजिटल ऐप से जोड़ने का काम करेंगी. गांव के सर्वे के बाद आशा डेटा अपलोग करेंगी और आशा कार्यकर्ता डिजिटल स्मार्ट बनेंगी. उनको किसी रजिस्टर पर लिखने-पढने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी. फोटो. 16 पूर्णिया 7- अमौर में एम-आशा ऐप का तीन दिवसीय प्रशिक्षण लेतीं आशा व आशा फैसिलिटेटर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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