‘जीवन में ब्रह्म के विचारों का सारगर्भित संकलन है पुस्तक अनुभूति के सोपान’

Published by : AKHILESH CHANDRA Updated At : 20 Nov 2025 6:38 PM

विज्ञापन

बहुत सहज नहीं है संस्कृत से उपनिषद का हिंदी में अनुवाद

विज्ञापन

डॉ. निरुपमा राय की पुस्तक का पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया लोकार्पण

कहा- बहुत सहज नहीं है संस्कृत से उपनिषद का हिंदी में अनुवाद, जारी रहे लेखन

पूर्णिया. शहर के कलाभवन में आयोजित सारस्वत अनुष्ठान में बहुचर्चित कथाकार डॉ. निरुपमा राय द्वारा लिखी पुस्तक ‘अनुभूति के सोपान’ का लोकार्पण पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ विवेकानंद सिंह ने किया. श्वेताश्वतर उपनिषद पर आधारित इस पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कुलपति डा. सिंह ने कहा कि संस्कृत से उपनिषद का हिंदी में अनुवाद कर देना बहुत बड़ी बात है और वह भी पद्य के रूप में अनुवाद करना बहुत बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने इसकी सराहना की और डॉ.निरुपमा राय को बधाई दी. उन्होंने पुस्तक की कई विशेषताओं पर अपने विचार रखे और कहा कि विद्वान प्राध्यापकों को लेखन कार्य निरंतर करते रहना चाहिए . मुख्य वक्ता डॉ.सावित्री सिंह ने पुस्तक के कई सूक्ष्म तत्वों और जीवन में ब्रह्म के विचार पर अपनी सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की और अनुभूति के सोपान को एक उत्कृष्ट पुस्तक बताया .

दीप प्रज्वलन से शुरू हुए सारस्वत समारोह में स्वागत भाषण करते हुए लेखिका डॉ. निरुपमा राय ने पुस्तक के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए पुस्तक को विद्वानों के सामने रखा. उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम भक्ति शब्द का प्रयोग और शिव को परब्रह्म मानने की परंपरा का प्रारंभ इसी उपनिषद से हुआ जो एक विशिष्ट बात है. मुख्य वक्ता के रूप में पूर्णिया कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सावित्री सिंह व जीएलएम कॉलेज बनमनखी के प्राचार्य प्रो. डॉ.प्रमोद भारतीय ने सारगर्भित पक्ष रखे. डॉ प्रमोद भारतीय ने कहा कि पूर्णिया की धरती साहित्य के लिए उर्वरा है. ऐसे में उपनिषद की इस पुस्तक का आना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है.

नीरस जीवन में रस भरती है पुस्तक

विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता सिन्हा ने कहा कि यह एक ऐसी पुस्तक है जो हमें रस से सराबोर करती है और नीरस जीवन में भी रस का संचार करती है. डॉ रामनरेश भक्त ने अनुभूति के सोपान की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. डॉ उषा शरण ने पुस्तक के सभी 6 अध्यायों पर सारगर्भित चर्चा करते हुए जीवात्मा ब्रह्म ईश्वर सनातन धर्म और ईश्वर से मानव के जुड़ाव के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला. डॉ. मुकेश कुमार सिन्हा ने इस पुस्तक पर और संपूर्ण उपनिषद साहित्य पर विवेचनात्मक बातें सामने रखी. दर्शनशास्त्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष विजयारानी ने पुस्तक पर एक समीक्षात्मक विवेचना की.

विश्वविद्यालय में गोष्ठी का दिया सुझाव

समाजसेवी विजय कुमार श्रीवास्तव ने इस पुस्तक पर एक विशेष गोष्ठी विश्वविद्यालय में रखने का सुझाव दिया. कार्यक्रम शुरू होने के बाद शॉल और स्मृति चिह्न देकर अतिथियों का स्वागत किया गया. पुस्तक के मुख्य पृष्ठ के चित्रकार पूर्णिया के विशिष्ट चित्रकार राजीव राज को सम्मानित किया गया. मंच संचालन अधिवक्ता बबीता चौधरी कर रही थी जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. निरुपमा राय ने किया. समारोह में डॉ दमन राय, डॉ. तूहिना विजय, डॉ सविता ओझा, किरण सिंह, किरण राय, सरिता झा, डॉ निशा प्रकाश, डॉ प्रेणिका वर्मा, डॉ. सविता, डॉ नीतू कुमारी, डॉ. अलका कुमारी, डॉ. हिना नकवी, शंभूनाथ झा, डॉ के के चौधरी, डॉ.अशोक आलोक, डॉ. नूतन आलोक, डॉ अंकिता विश्वकर्मा, डॉ. सीता कुमारी, डॉ मिताली मीनू आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
AKHILESH CHANDRA

लेखक के बारे में

By AKHILESH CHANDRA

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन