नहाय खाय के साथ आज से शुरू हो जाएगा जिउतिया का पर्व

Published by : AKHILESH CHANDRA Updated At : 12 Sep 2025 5:09 PM

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संतान की दीर्घायु

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पूर्णिया. मातृ प्रेम और संतान की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जिउतिया शनिवार 13 सितंबर से शुरू हो जाएगा. रविवार को माताएं 24 घंटे का निर्जला व्रत करेंगी. जिउतिया पर्व हिंदू धर्म में बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाये जाने वाला पर्व है. इस पर्व को लेकर मां उत्साहित रहती है. संतान की लंबी आयु को लेकर यह पर्व मनाया जाता है. जिउतिया को लेकर मिठाई दुकानों की बिक्री बढ़ गई है. शुक्रवार को पर्व को लेकर शाम तक बाजार में पूजा सामग्रियों की खरीदारी करने के लिए व्रती माताओं की भीड़ रही. पूजा दुकान, फल दुकान एवं मिठाई दुकान पर पर्व करने वाली महिलाओं की भीड़ लगी रही. गौरतलब है कि संतान की रक्षा, निरोगी काया और लंबी आयु की कामना के लिए माताएं जिउतिया का निर्जला व्रत रखती हैं. नहाय खाय के साथ इस पर्व की शुरुआत होने के बाद पारण के बाद व्रत का समापन होता है. इस पर्व को लेकर शनिवार की सुबह स्नान के लिए सौरा नदी के काली घाट पर महिलाएं डुबकी लगाएंगी. कई महिलाएं घरों में ही इस परंपरा का निर्वाह करती हैं. पंडित शिव शंकर झा बताते हैं कि यह व्रत प्राचीन काल से संतान रक्षा के लिए किया जाता है. व्रती महिलाएं गंगा, तालाब या घर पर स्नान कर पितरों का स्मरण करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत प्रारंभ करती हैं. व्रत के दिन महिलाएं आंगन में गोबर से पोखर या नदी का प्रतीक बनाकर पाकड़ की डाली रोपती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. व्रत के दौरान महिलाएं फल, पकवान और भजन-कीर्तन से वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं. बाजार में खाजा की बिक्री जोरों पर जिउतिया को लेकर बाजारों में खाजा की बिक्री जोरों पर है. शुक्रवार को बाजारों में डलिया समेत पूजन सामग्रियां खरीदी गईं. मिठाई के रुप में खाजा की सर्वाधिक डिमांड रही. इस पर्व में मुख्य प्रसाद के रूप में इसी मिठाई को चढ़ाया जाता है. यही वजह है कि शहर में खाजा की कई मौसमी दुकानें सज गई हैं. दूकानदार भी रिफाइन, बनस्पति व घी में खाजा तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं. इसपर्व में सिलाव एवं पिपरा का खाजा बहुतायत में उपलब्ध है. कारीगर भी बाजार में इसकी मांग को देखते हुए लगातार खाजा के निर्माण कार्य में लगे हुए हैं. कई दुकानों में डिमांड पर सिलाव और पिपरा की तर्ज पर खाजा बनाए और बेचे जा रहे हैं.

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