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आज भी मार्गदर्शक हैं संत कबीर के विचार

Updated at : 02 Jan 2026 7:41 PM (IST)
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आज भी मार्गदर्शक हैं संत कबीर के विचार

केनगर

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केनगर. केनगर प्रखंड के जगनी पंचायत के पूर्व मुखिया जगनी ए गांव निवासी अघोरी पासवान ने पिछले साल की भांति इस नववर्ष अवसर पर भी दो दिवसीय संत कबीर सत्संग का आयोजन किया .समापन पर चपैय गांव के सदगुरु विचारक व संत गिरजानंद दास जी महाराज ने कहा कि कबीर साहेब संत सम्राट ही नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों के रक्षार्थ सामाजिक एकता के प्रतीक थे. विषमता व कुरीतियों के खिलाफ अपनी वाणी से जीवों को चेताने का काम किया. जीवन व मिशन के सबंध में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि कबीर मार्गी पंचशील के सिद्धांत पर चलकर ही मानव व विश्व का कल्याण कर सकते हैं. जीव हत्या, चोरी, पर स्त्री पर पुरुष का गमन, झूठ व किसी प्रकार के नशा के उपयोग वर्जित है. कबीर मानवतावादी, समतावादी संत सम्राट थे. वही मंचासीन बडहारा की उर्मिला साध्वी जी ने कहा कि कबीर साहेब हिन्दी कविता के इतिहास में प्रथम विद्रोही जनकवि ही नहीं सामाजिक अन्याय, विषमता के खिलाफ अनवरत अपनी वाणी से वैचारिक क्रांति की अलख जगाते रहे. कहा कि बिना सदगुरु के जीवन निष्फल है और एक साधारण वस्तु ज्ञान की प्राप्ति के लिए भी गुरु का मार्ग अपनाना पड़ता है. दो दिवसीय संत कबीर साहेब संतमत सत्संग में शुक्रवार प्रातः कालीन बेला तक भजन कीर्तन बाद समापन कर दिया गया. इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य सुनील मेहता, अरविंद पासवान, गोकुलपुर के सत्संग प्रेमी सह समाज सेवी एवं अन्य जगनी ए गांव निवासी का सत्संग की सफलता को लेकर सराहनीय योगदान देखा गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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