श्री अन्न पर अनुसंधान शुरू, अगले साल से बीज की आपूर्ति

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 May 2024 5:59 PM

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कोसी-सीमांचल में चयनित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में श्री अन्न पर अनुसंधान प्रारंभ हो गया है

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पूर्णिया. कोसी-सीमांचल में चयनित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में श्री अन्न पर अनुसंधान प्रारंभ हो गया है. अगले साल से बीज की आपूर्ति की जायेगी. इसी सिलसिले में बिहार कृषि विवि के कुलपति डॉ डीआर सिंह एवं निदेशक अनुसंधान के निर्देश पर भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालयने सेंटर ऑफ एक्सीलेन्स फाॅर मिलेट वैलू चेन परियोजना अंतर्गत कार्यशाला सह स्टेक होल्डर मीट आन मिलेट कार्यक्रम आयोजित किया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पारसनाथ ने की. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में मोटे अनाज श्री अन्न में मुख्य रूप से मडुआ, कौनी एवं बाजरा पर अनुसंधान कार्य प्रारंभ किया गया है. इसके लिए बिहार कृषि विवि से शस्य वैज्ञानिक डाॅ राधेश्याम को परियोजना अन्वेषक एवं मृदा वैज्ञानिक डॉ पंकज कुमार यादव को सह परियोजना अन्वेषक नामित किया गया है. अनुसंधान के साथ श्री अन्न के बीज उत्पादन का कार्य भी किया जा रहा है. मोटे अनाज की खेती को बढावा देने के लिए आने वाले समय में किसानो को बीज प्रदान कर उनके खेतो में प्रदर्शन किया जायेगा. प्रसंस्करण एवं बाजार विपणन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थान एक्रीसेट, हैदराबाद आवश्यक पहल कर रहा है. जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार ने विभिन्न प्रखंडों में उगाये जा रहे मिलेट्स एवं मिलेट्स को बढावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की. उन्होंने कहा कि श्री अन्न को सुपर फूड की क्षेणी में रखा जा रहा है. इसके उत्पादन तकनीकी, प्रसंसकरण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन की अपार संभावनाएं हैं. सेंटर परियोजना अन्वेषक डाॅ राधेश्याम ने मिलेट्स संबंधित परियोजना की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मिलेट्स के विभिन्न मूल्य संर्वधित उत्पाद का उत्पादन कर महिलाओं को कृषि उद्यमी बनाया जा सकता है. कुपोषण से मुक्ति मिल सकती है. सेंटर को-पीआइ डॉ पंकज कुमार यादव ने मिलेट्स में पोषक तत्व प्रबंधन एवं इसके प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि श्री अन्न को अपने भोज्य पदार्थ के रूप में सम्मिलित करके मानव स्वास्थ्य को नई दिशा मिल सकती है. कार्यक्रम में अन्तराष्ट्रीय संस्थान एक्रीसेट, हैदराबाद के दो वैज्ञानिकों डॉ प्रियंका एवं डॉ दिशा बसु की सहभागिता रही. कृषि विज्ञान केन्द्र, जलालगढ़ के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ केएम सिंह ने कहा कि श्री अन्न को बढावा देने हेतु प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है. जलवायु अनुकुल कृषि कार्यक्रम के अर्न्तगत 35 एकड़ प्रक्षेत्र में श्री अन्न का उत्पादन किसानों के खेत पर किया जा रहा है. डॉ गोविन्द कुमार ने कहा कि हम विभिन्न प्रशिक्षणों एवं प्रत्यक्षण के माध्यम से मोटे अनाज को बढावा दे रहे हैं. जीविका के कौशलेन्द्र प्रसाद ने कहा कि धमदाहा प्रखण्ड के रूपसपुर खरहा पंचायत के वरकोना ग्राम में 4-5 जीविका दीदी का समूह मडुआ की खेती करीब 10-15 कठ्ठा में कर रही है. एफपीओ राम प्रकाश ,युवराज मनीष ,सुजय धोसाल, षान्तिना टुढु आदि ने विचार व्यक्त किये. मच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन में वैज्ञानिक डॉ सूरज प्रकाश ने किया.

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