नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन टैगोर रचित ‘चित्रांगदा’ नाटक की प्रस्तुति

Published by :ARUN KUMAR
Published at :28 Apr 2025 6:52 PM (IST)
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नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन टैगोर रचित ‘चित्रांगदा’ नाटक की प्रस्तुति

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से रेणु रंगमंच संस्थान, पूर्णिया की ओर से कला भवन नाट्य विभाग के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित दो दिवसीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन चित्रांगदा नाटक की प्रस्तुति की गयी.

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पूर्णिया. संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से रेणु रंगमंच संस्थान, पूर्णिया की ओर से कला भवन नाट्य विभाग के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित दो दिवसीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन चित्रांगदा नाटक की प्रस्तुति की गयी. रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा रचित चित्रांगदा नाटक का निर्देशन अजीत कुमार सिंह बप्पा कर रहे थे. नाटक चित्रांगदा में मणिपुर के राजा चित्रवाहन को भगवान शिव के वरदान से पुत्री प्राप्त होती है. राजा चित्रवान अपने पुत्री का नाम चित्रांगदा रखा और उसे पुत्र के समान लालन पालन किया. राजकुमारी चित्रांगदा को युद्ध कौशल, धर्मशास्त्र, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, न्याय शास्त्र और धनुर्विद्या से पारंगत किया. चित्रांगदा मात्र पुत्री होने के कारण वह अपने राज्य के लिये एक पुरुष का वेश धारण कर राज्य और प्रजा के रक्षा के लिए मर मिटने को तैयार रहती थी. कभी चित्रांगदा के मन में विचार नहीं उठा की वह एक स्त्री है परंतु जब अर्जुन बारह वर्ष के लिये वनवास को जाते हैं और बहुत लंबे समय के बाद वह मणिपुर लौटते हैं. इसी बीच अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिये प्रसिद्ध है. राजकुमारी चित्रांगदा एक दिन शिकार के लिए निकली थी. उसने अर्जुन को देखा और पहली बार उसे अर्जुन से प्यार हो गया. अर्जुन भी उसके एक वीर योद्धा की तरह के रूप से बहुत प्रभावित हुए पर इस भ्रम में थे कि वह एक लडका है. चित्रांगदा को लगा कि इस रूप (कुरुपा) में वह कभी भी उससे प्यार नहीं करेगा. यह सोचकर वह कामावेदा (प्रेम के देव मदन और वसन्त) से वरदान मांगती है कि उसे कुछ वक्त के लिये दुनिया की सबसे सुंदर लडकी बना दें ताकि अर्जुन उसे देखते ही उससे प्यार कर ले. वह इस रूप (सुरुपा) में उसके सामने आती है और अर्जुन उसको अपनी ओर आकर्षित कर लेता है. उसके पास सब कुछ है पर वह चाहती है कि अर्जुन उसके वास्तविक रूप में उस से प्यार करे. अंततः प्रेम में द्वंद प्रतिद्वंद के बाद अर्जुन से विवाह होता है. नाट्य प्रस्तुति को सफल बनाने के लिए रेणु रंगमंच संस्थान, पूर्णिया के सचिव एवं निर्देशक अजीत कुमार सिंह, बप्पा, अध्यक्ष, लकी चटर्जी अंजनी श्रीवास्तव कला भवन नाट्य विभाग के संयोजक व सचिव विश्वजीत कुमार सिंह, रजनीश मयंक सिंह, प्रियांक सिंह आदि कलाकार लगे थे.

उत्कृष्ट कार्य के लिये सम्मानित हुए कलाकार

इससे पूर्व नाटक का उद्घाटन राजेश्वरी सिंह, राष्ट्रपति पुरस्कार से विभूषित संजय कुमार सिंह, पूर्णिया के वरिष्ठ रंगकर्मी और नाट्य निर्देशक स्वरूप दास, रेणु रंगमंच संस्थान के सचिव अजीत कुमार सिंह बप्पा, नाट्य विभाग के संयोजक एवं सचिव विश्वजीत कुमार सिंह, नाट्य निर्देशक कुंदन कुमार सिंह,पटना के नाट्य निर्देशक मणिकांत चौधरी, किसान ग्रीन नाथ झा एवं गणमान्य व्यक्ति ने किया. रेणु रंगमंच संस्थान पूर्णिया ने पूर्णिया जिला के प्रसिद्ध लोक गायिका चांदनी शुक्ला और कलाकार त्रिदीप शील को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रेणु शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया. वहीं दर्शक दीर्घा में उपस्थित ग्रीन नाथ झा को भी रविन्द्र नारायण सम्मान से सम्मानित किया गया.

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