पूर्णिया सिटी के जैन मंदिर में सजा माता पद्मावती व श्री भैरव जी महाराज का दरबार

भगवान पार्श्वनाथ की पूजा
निष्ठा व आस्था के साथ की गई शक्ति स्वरुपा माता पद्मावती और भगवान पार्श्वनाथ की पूजा
जैन मंदिर के दो दिवसीय वार्षिकोत्सव पर हुआ समागम, शांति कलश व ध्वजारोहण आज
पूर्णिया. जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित पूर्णिया सिटी के ऐतिहासिक जैन मंदिर में जैन धर्मावलम्बियों ने पूरी आस्था के साथ माता पद्मावती और अधिष्ठनायक श्री भैरव जी महाराज का दरबार सजाया. इस अवसर पर माता पद्मावती का पूजन अनुष्ठान एवं घंटाकर्ण महावीर जी का हवन किया गया जबकि भैरवजी महाराज का नाआंगी पूजन कर छप्पन भोग लगाए गये. भगवान पार्श्वनाथ मंदिर के वार्षिकोत्सव पर पूरा पूर्णिया सिटी प्रभु के जयकारे से गूंजता रहा. शाम में भजन संध्या से पूरे इलाके में भक्ति की समां बंध गयी. इस अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ के मंदिर में तमाम लोगों ने मत्था टेका.दरअसल, शनिवार से सिटी जैन मंदिर का दो दिवसीय वार्षिकोत्सव की शुरुआत हुई जिसमें न केवल पूजन अनुष्ठान किया गया बल्कि आसपास के जैन धर्मावलम्बियों का समागम भी हुआ. मंदिर के वार्षिकोत्सव के मौके पर न केवल पूर्णिया प्रमंडल बल्कि कोलकाता, नेपाल और बंगाल से भी जैन अनुयायी पूर्णिया सिटी पहुंचे और माता पद्मावती और अधिष्ठनायक श्री भैरव जी महाराज के दरबार में शीश नवाए. इस मौके पर पूर्णिया सिटी में जैन श्रद्धालुओं की पूरी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा सिटी बाबा भैरव देव की जयकारा से गूंज उठा. इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के आयोजन के दौरान पूर्णिया सिटी में जैन धर्मावलंबियों का मेला लगा रहा. वार्षिकोत्सव के पहले दिन सबसे पहले मंत्रोच्चार के साथ शक्ति स्वरुपा माता पद्मावती की पूजा की गई. इसमें श्रद्धालुओं ने जैन पद्धति के साथ पूजन का आयोजन किया था.
गूंजता रहा अधिष्ठनायक भैरव देव का जयकारा
विधिकारक दुर्गेश झा एवं कोलकाता से आए पुरोहित अनुष्ठान करा रहे थे. इस बीच माता पद्मावती दैव्यै: नम:,श्री पार्श्वनाथाय: नम:, श्री शान्तिनाथाय: नम:, श्री महावीराय नम:,अधिष्ठनायक भैरव देवाय नम: जैसे मंत्र भी गूंजते रहे. माता पद्मावती के बाद पूजन के अगले चरण में अधिष्ठनायक श्री भैरव जी महाराज की पूजा पूरी निष्ठा और आस्था के साथ की गई तथा मंत्रोच्चार के साथ हवन किया गया. इससे पहले छप्पन भोग लगाया गया. पूजन के बाद लाउडस्पीकरों पर भैरव जी देव की जयकारा देर शाम तक गूंजता रहा. पूजा प्रक्रिया इतनी लंबी थी कि शाम हो गई. संध्या काल भक्तों ने माता पद्मावती एवं भैरव महाराज की आरती उतारी. मंदिर समिति के सचिव संजय कुमार जी संचेती ने बताया कि पूर्णिया सिटी का यह मंदिर पूरे पूर्णिया व कोसी में आस्था का केन्द्र बना हुआ है. रविवार को अनुष्ठान के साथ इसका समापन होगा.————————-
जैन मंदिर का इतिहास
पूर्णिया सिटी स्थित जैन मंदिर का इतिहास सात सौ साल से भी अधिक पुराना है. इसका उल्लेख मंदिर में देवनागरी लिपि में आया है पर बहुत स्पष्ट नहीं दिखता. कहते हैं, उस जमाने में भी इस मंदिर की काफी प्रसिद्धि थी. करीब सौ साल पूर्व कोलकाता के हरखचंद काकड़िया परिवार की ओर से इसके देख-रेख की जाती थी. मगर, कालांतर में यह मंदिर खंडहर बन गया था. 2003-04 में पुन: जैन धर्मावलंबियों ने इसके जीर्णोद्धार की पहल की. उस समय ओम प्रकाश सोनावत, विजय सिंह बैद, खेमचंद संचेती, शेखर जी संचेती, तेज बहादूर जैन, डालचंद जी संचेती समेत समाज के कई लोग आगे आए और खंडहर में तब्दील इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. आज पूरे सीमांचल में इस मंदिर के प्रति लोगों की असीम आस्था है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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