प्राथमिक विद्यालय के कौशल कक्ष में बच्चों को मिल रही व्यावसायिक शिक्षा, एनईपी के तहत आत्मनिर्भरता पर जोर

Published by : Shruti Kumari Updated At : 08 Jun 2026 12:32 PM

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व्यावसायिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण लेते छात्र-छात्राएं

Katihar Skill Education: विद्यालय की प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी के मार्गदर्शन में बच्चे आचार बनाना, पापड़ निर्माण, पेपर क्राफ्ट, आर्ट एंड क्राफ्ट, सजावटी फूल तैयार करना तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां सीख रहे हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ-साथ जीवनोपयोगी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं.

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Katihar Skill Education: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में पूर्णिया के प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला, मजगामा में सराहनीय पहल की जा रही है. विद्यालय में स्थापित कौशल कक्ष के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विभिन्न व्यावसायिक एवं कौशल आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

विद्यालय की प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी के मार्गदर्शन में बच्चे आचार बनाना, पापड़ निर्माण, पेपर क्राफ्ट, आर्ट एंड क्राफ्ट, सजावटी फूल तैयार करना तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां सीख रहे हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ-साथ जीवनोपयोगी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं.

एनईपी के तहत कौशल विकास पर विशेष फोकस

प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक, रचनात्मक और रोजगारोन्मुखी कौशलों से जोड़ना भी है. इसी सोच के तहत विद्यालय में नियमित रूप से कौशल आधारित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, सहयोग की भावना और उद्यमिता कौशल का विकास हो रहा है.

रचनात्मक गतिविधियों में दिखा बच्चों का उत्साह

विद्यालय के छात्र-छात्राएं विभिन्न सामग्रियों की मदद से आकर्षक और उपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर रहे हैं. इससे उनमें श्रम के प्रति सम्मान और स्वावलंबन की भावना भी विकसित हो रही है.

शिक्षकों का मानना है कि प्रारंभिक स्तर पर कौशल शिक्षा बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उन्हें भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार करती है.

अभिभावकों ने की पहल की सराहना

स्थानीय अभिभावकों और समुदाय के लोगों ने विद्यालय की इस पहल की प्रशंसा की है. उनका कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को निखारने में भी मददगार साबित हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है और ऐसे प्रयासों को अन्य विद्यालयों में भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

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