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कुत्तों का बढ़ा आतंक हर दिन दर्जन भर नए मरीज पहुंच रहे जीएमसीएच

Updated at : 22 Jan 2025 6:13 PM (IST)
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Purnia University

हर दिन दर्जन भर नए मरीज पहुंच रहे जीएमसीएच

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हर माह अमूमन एक हजार से ज्यादा लोगों की दी जाती है एंटी रेबीज वैक्सीन

पूर्णिया. इन दिनों कुत्ता द्वारा काट खाए जाने वाले मामलों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. गांव घरों और गली मुहल्लों की सड़कों पर आवारा घूमने वाले बड़े अथवा छोटे पिल्लै द्वारा बड़ों से लेकर बच्चों तक को काट लेने या नाख़ून गड़ाने जैसे मामले सामने आ रहे हैं. आंकड़े की अगर बात की जाय तो राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में ऐसे लगभग दर्जन भर नये लोग प्रतिदिन आते हैं जिन्हें एंटी रेबीज का इंजेक्शन दिया जाता है. वे सभी प्रायः किसी न किसी प्रकार के जंगली जीवों द्वारा काट खाए गये होते हैं. इसके अलावा अगर पूरे महीने की बात करें तो नए और पुराने मरीजों को जोड़कर लगभग 1000 से भी ज्यादा मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन प्रतिमाह दिया जाता है. इसके अलावा निजी तौर पर भी लोग एंटी रेबीज का टीका बाजारों से खरीदकर लगवाते हैं.

3 से 5 डोज तक लेने की होती है जरूरत

चिकित्सकों का कहना है कि प्रभावित मरीज को तीन से लेकर पांच डोज तक एंटी रेबीज वैक्सीन के कोर्स पूर्ण करवाए जाते हैं. प्रिवेंटिव के लिए पहली सुई के तीसरे दिन और सातवें दिन यानि तीन वैक्सीन, यदि गंभीर काटने के मामले हैं जिसमें कुत्ते द्वारा कई लोगों अथवा मवेशियों को भी काट लिया है और कुत्ते की मौत हो गयी है तो तीन वैक्सीन के बाद चौदहवें और 28वें दिन भी यानि कुल मिलाकर उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन की पांच डोज लेने की जरुरत पड़ती है. इसके अलावा जख्म वाले स्थान पर भी चिकित्सीय उपचार की जरुरत होती है.

जीएमसीएच में कई दिनों तक अनुपलब्ध रही एंटी रेबीज वैक्सीन

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में अमूमन जंगली जीवों के साथ साथ सांप द्वारा काटे गये मामले में वैक्सीन लेने के लिए लोगों का हर रोज आना लगा रहता है लेकिन पिछले कुछ दिनों तक एंटी रेबीज वैक्सीन समाप्त हो जाने की वजह से कई दिनों तक डॉग बाइट के शिकार लोगों को वैक्सीन सेंटर से बैरंग लौटना पड़ा. जबकि कुछ पीड़ितों ने बताया कि बाजार से उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन की डोज खरीद कर लगवानी पडी वहीं कई पीड़ितों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की ओर अपना रुख किया.

कुत्ता अथवा जंगली जीव द्वारा काटे जाने पर क्या करें

चिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई जंगली जीव या कुत्ते बिल्लियों द्वारा दांत गड़ा दिये जाने के बाद चिकित्सक की सलाह से एंटी रेबीज वैक्सीन जरुर लें. साथ ही जख्म वाले जगह को समय समय पर साबुन, शैम्पू या डिटर्जेंट से खूब साफ़ करना चाहिए इससे रेबीज के जर्म्स कमते हैं या बिलकुल ही साफ़ हो जाते हैं. साफ़ सफाई के साथ साथ निर्धारित अंतराल और सुई की डोज भी जरूरी है.

बोले पशु चिकित्सक

कोई भी जंगली जीव हो या कुत्ता, आवारा हो या पालतू अगर वो काट ले तो समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन लेना बेहद जरुरी है इसी के द्वारा रेबीज रोग से लोगों को बचाया जा सकता है क्योंकि रेबीज के लक्षण कुछ दिनों बाद प्रकट होते हैं और उसके बाद मरीज को बचाना असंभव हो जाता है.डॉ. श्रवण कुमार साहा, पशु चिकित्सक

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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