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हवाई हमलों व आपदा में बचाव को ले सीमांचल में युवाओं का जत्था तैयार करेगा गृह विभाग

Updated at : 17 Jun 2025 6:01 PM (IST)
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हवाई हमलों व आपदा में बचाव को ले सीमांचल में युवाओं का जत्था तैयार करेगा गृह विभाग

सिविल डिफेंस को दिया जा रहा पुनर्जीवन

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूर्णिया में सिविल डिफेंस को दिया जा रहा पुनर्जीवन चयनित युवाओं को दी जाएगी ट्रेनिंग, नागरिकों को सिखाएंगे वे बचाव का गुर सिविल डिफेंस द्वारा शुरू की जा रही है स्वयंसेवक युवाओं के चयन की कवायद पूर्णिया. हवाई हमलों और आपदा के मौके पर आम नागरिकों के बचाव और राहत के उद्देश्य केन्द्रीय गृह मंत्रालय सीमांचल में युवाओं का जत्था तैयार करेगा. इसके लिए चयनित युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी और वही युवा नागरिकों को आपात स्थिति में खुद के बचाव का गुर सिखाएंगे. खास तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रकरण के बाद इसके लिए मृतप्राय हो चुके सिविल डिफेंस को फिर सक्रिय करने की पहल शुरू कर दी गयी है. सीमांचल के संवेदनशील जिलों में पहले से कार्यरत सिविल डिफेंस द्वारा स्वयंसेवक युवाओं के चयन की कवायद शुरू कर दी गयी है. गौरतलब है कि चीन के हमलों से मिली सबक के बाद 1968 में अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटकर अवस्थित पूर्णिया जिले में सिविल डिफेंस याने नागरिक सुरक्षा संगठन की नींव डाली गयी थी. उस समय केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा नागरिक सुरक्षा की स्थापना हवाई हमलों से बचने के लिए की गयी थी. शुरुआती दौर में इसकी सक्रियता काफी थी पर बीच के कालखंड में इसकी गतिविधियां कहीं शिथिल पड़ गईं तो कहीं काम को डायवर्ट कर दिया गया. इधर, ऑपरेशन सिंदूर के समय सुरक्षा को लेकर अति संवेदनशील घोषित पूर्णिया में इसकी उपयोगिता एक बार फिर सिद्ध हुई. युद्ध के समय आम नागरिकों द्वारा सुरक्षात्मक कदम के तहत सायरन और मॉकड्रील किये जाने के बाद सिविल डिफेंस सुर्खियों में आया और इसी समय गृह मंत्रालय द्वारा इसको लेकर आदेश भी जारी किए गये. जानकारों की मानें तो इन आदेशों के आलोक में परिदृश्य से ओझल हुए सिविल डिफेंस को पुनर्जीवन देने की कोशिश शुरू कर दी गई. अब नये सिरे से जनसंख्या के आधार पर सुरक्षा वोलेंटियर्स बनाए जाएंगे. सिविल डिफेंस के पुनर्स्थापन की जगी उम्मीद ऑपरेशन सिंदूर अभियान के साथ ही जिले में सिविल डिफेंस के प्रति आम लोगों की उत्सुकता बढी है. गृह विभाग के निर्देश पर नागरिक सुरक्षा के पुनर्स्थापन की उम्मीद जगी है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल जिले में पूर्व से कार्यरत 458 आपदा मित्रों को सुरक्षा वोलेंटियर्स बनाये जाने की प्रक्रिया चल रही है जबकि इसका निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया जाना है. यानि कि इन सब के अलावा भी बड़ी संख्या में वोलेंटियर्स की जरूरत होने वाली है. इनके अतिरिक्त विभिन्न स्तरों पर वार्डेन पद पर भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट लोगों को जोड़ने का कार्य किया जाएगा मिली जानकारी के अनुसार सिविल डिफेंस के क्षेत्र में जिले में 3 हजार से भी ज्यादा युवा वोलेंटियर्स को जोड़ने का लक्ष्य है. नागरिक सुरक्षा वोलेंटियर्स के लिए अमूमन विभिन्न सामाजिक कार्यों में रूचि रखने वाले युवाओं में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाईड, नेहरू युवा केंद्र, रेडक्रॉस आदि के सदस्यों को शामिल किया जाता है. 1971 के बाद हाशिये पर जाने लगा सिविल डिफेंस नागरिक सुरक्षा केन्द्र, राज्य एवं जिला तीनों स्तर पर क्रियाशील थी. सिविल डिफेंस के तहत जिला से लेकर अनुमंडल, प्रखंड तक वार्डन की व्यवस्था थी. जबकि बड़ी संख्या में वोलेंटियर्स भी थे. सभी स्तरों पर वार्डेन की सेवा बिलकुल सामाजिक और अवैतनिक सेवा थी. हालिया सालों में भी सिविल डिफेंस के वोलेंटियर्स ने बाढ़, अगलगी, भूकंप जैसे आपदा के समय में भी आम लोगों की भरपूर मदद की है. लेकिन गुजरते समय के साथ साथ सिविल डिफेंस के प्रति उदासीनता की वजह से यह हाशिये पर जाने लगा. हालांकि विभाग कार्यरत रहा लेकिन इसमें शामिल लोग घटते चले गये. आलम यह है कि जिले में से इसके सभी पद रिक्त पड़े हैं. जिन जिन स्थानों पर अलर्ट सायरन लगाये गये थे वे सभी महज नाम के रह गये हैं. आज भी हैं 69 वोलेंटियर्स बीच के कालखंड में काम में स्वरुप बदल गया पर सिविल डिफेंस का अस्तित्व हमेशा बना रहा. जिले में आज भी सिविल डिफेन्स के 69 वोलेंटियर्स हैं इनमें 40 पुरुष एवं शेष 29 महिलाएं हैं. लेकिन उनकी यह संख्या जिले की संपूर्ण आबादी के अनुसार बिलकुल ही सूक्ष्म है. बावजूद इसके हालिया वर्षों में सिविल डिफेंस के इन वोलेंटियर्स ने तीन चरणों में 91 विद्यालयों में लगभग 6 हजार स्कूली बच्चे बच्चियों को आपदा से संबंधित प्रशिक्षण एवं मॉकड्रील का सजीव प्रदर्शन करते हुए उन्हें जागरूक किया है. बोले प्रभारी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल आबादी साढ़े 32 लाख से ज्यादा है उस अनुसार गृह विभाग द्वारा निर्धारित मानक प्रति एक हजार जनसंख्या पर एक स्वयं सेवक का चयन किया जाना है. सभी स्तरों पर वार्डेन के साथ साथ शहर के तीन प्रमुख स्थानों प्रेक्षागृह, सर्किट हाउस एवं गुलाबबाग स्थित ऊंचे स्थल को सायरन लगाने के लिए चिन्हित किया जा रहा है. सायरन की टेस्टिंग भी की जा रही है. राजीव कुमार, प्रभारी अनुदेशक नागरिक सुरक्षा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ARUN KUMAR

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