हर माह डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते बना रहे अपना निशाना

Published by : AKHILESH CHANDRA Updated At : 03 Dec 2025 6:24 PM

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एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए प्रत्येक महीने पहुंचते हैं जीएमसीएच

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लगभग दो हजार लोग एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए प्रत्येक महीने पहुंचते हैं जीएमसीएच पूर्णिया. विभिन्न प्रकार के पशुओं का मानव के साथ सदियों पुराना रिश्ता रहा है. इनमें सबसे ज्यादा वफादार होने का श्रेय विभिन्न प्रजातियों के कुत्तों को जाता है. लेकिन हालिया वर्षों में जिस प्रकार के इनकी आक्रामकता के वीडियोज सोशल मीडिया पर दीखते हैं उनमें इनके द्वारा दूसरों पर हमला के अलावा अपने स्वामियों तक को काटने, नोचने एवं ह्त्या तक कर देने वाले मामले सामने आये हैं. जबकि गलियों मुहल्लों में घुमने वाले आवारा कुत्तों के झुण्ड भी कब किसपर आक्रमण कर दें इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. वजह कुछ भी हो लेकिन यह सच है कि शहर हो या गांव डॉग बाईट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. स्थानीय राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाय तो यहां अमूमन हर माह एक से डेढ़ हजार डॉग बाइट के नए मामले सामने आ रहे हैं जबकि प्रति माह एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या डेढ़ से दो हजार है. दूसरी ओर अन्य अस्पतालों एवं निजी तौर पर भी बड़ी संख्या में लोग एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाते हैं. सरकारी अस्पतालों में ये टीके निःशुल्क लगाये जाते हैं जबकि निजी तौर पर इसे मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है.

3 से 5 डोज तक लेने की होती है जरुरत

चिकित्सकों का कहना है कि प्रभावित मरीज को तीन से लेकर पांच डोज तक एंटी रेबीज वैक्सीन के कोर्स पूर्ण करवाए जाते हैं. प्रिवेंटिव के लिए पहली सुई के तीसरे दिन और सातवें दिन यानि तीन वैक्सीन, यदि गंभीर काटने के मामले हैं जिसमें कुत्ते द्वारा कई लोगों अथवा मवेशियों को भी काट लिया है और कुत्ते की मौत हो गयी है तो तीन वैक्सीन के बाद चौदहवें और अट्ठाईसवें दिन भी यानि कुल मिलाकर उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन की पांच डोज लेने की जरुरत पड़ती है. इसके अलावा जख्म वाले स्थान पर भी चिकित्सीय उपचार की जरुरत होती है.

कुत्ता अथवा जंगली जीव द्वारा काटे जाने पर क्या करें

पशु विज्ञान विशेषज्ञ का कहना है कि अमूमन रेबीज से ग्रसित जानवरों के काटने पर उनके मुंह से निकलने वाली लार से पीड़ित व्यक्ति को रेबीज होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है लेकिन सामान्य स्थिति वाले जीवों के काटने पर भी सुरक्षात्मक उपाय के रूप में पोस्ट बाईट रेबीज वैक्सीन जितनी जल्द हो सके ले लेनी चाहिए क्योंकि मनुष्यों में रेबीज के लक्षण प्रकट हो जाने के बाद उसे बचाना मुश्किल है. चिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई जंगली जीव या कुत्ते बिल्लियों द्वारा दांत गड़ा दिये जाने के बाद चिकित्सक की सलाह से एंटी रेबीज वैक्सीन जरुर लें. साथ ही जख्म वाले जगह को कुछ देर तक साबुन, शैम्पू या डिटर्जेंट से खूब साफ़ करना चाहिए इससे रेबीज के जर्म्स कमते हैं. साफ़ सफाई के साथ साथ निर्धारित अंतराल पर सुई की डोज भी जरुरी है.

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जीएमसीएच के बोलते आंकड़े

आनेवाले नए पीड़ितों की संख्या

अगस्त – 1366

सितम्बर – 1369

अक्टूबर – 1198

टीके लगाये गये

अगस्त – 1840

सितम्बर – 1889

अक्टूबर – 1695

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बोले विशेषज्ञ

कोई भी जंगली जीव हो या कुत्ता, आवारा हो या पालतू अगर वो काट ले तो रेबीज से सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन लेना बेहद जरुरी है इसी के द्वारा रेबीज रोग से लोगों को बचाया जा सकता है क्योंकि रेबीज के लक्षण कुछ दिनों बाद प्रकट होते हैं और उसके बाद मरीज को बचाना असंभव हो जाता है.

डॉ. राजकुमार साह, पशु विज्ञान विशेषज्ञ, भोपाशा. कृषि महाविद्यालय

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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