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बड़े तीखे हैं प्याज के भाव, परेशान लोग कह रहे- प्याज देखें, सेब ही खायें

Updated at : 27 Sep 2019 8:00 AM (IST)
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बड़े तीखे हैं प्याज के भाव, परेशान लोग कह रहे- प्याज देखें, सेब ही खायें

पूर्णिया : प्याज की कीमत में अचानक आये उछाल से एकबार फिर आम आदमी की आंखों से आंसू छलक पड़े हैं. अचानक भाव चढ़ जाने से आम आदमी की थाली से प्याज गायब हो गया है. भाव के मामले में प्याज सेव की बराबरी करने लगा है. थोक मंडियों में प्याज का भाव जहां 40 […]

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पूर्णिया : प्याज की कीमत में अचानक आये उछाल से एकबार फिर आम आदमी की आंखों से आंसू छलक पड़े हैं. अचानक भाव चढ़ जाने से आम आदमी की थाली से प्याज गायब हो गया है. भाव के मामले में प्याज सेव की बराबरी करने लगा है.

थोक मंडियों में प्याज का भाव जहां 40 से 50 रुपये है वहीं खुदरा बाजार में वही प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. कमोवेश इसी दाम में सेब भी बिक रहा है. अनुमान है कि लोगों को अभी और कुछ दिन प्याज की महंगाई झेलनी पड़ सकती है.
दरअसल, महाराष्ट्र और बिहार के प्याज उत्पादक क्षेत्रों में इस दफे भारी वर्षा के कारण फसलों का काफी नुकसान हो गया. यही वजह है है कि पूर्णिया और आस पास की मंडियों में प्याज का आवक काफी कम हो गया है जबकि मांग अभी भी अधिक है. नतीजतन थोक मंडियों में प्याज के दाम चढ़ गये है और इसका असर खुदरा बाजारों पर भी पड़ा है.
यह अलग बात है कि मुनाफा के फेर में खुदरा बाजारों में मंडियों की तुलना में काफी ज्यादा दाम लिए जा रहे हैं. थोक मंडियों में प्याज का भाव जहां 50 रुपये है वहीं खुदरा बाजार में वही प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
भंडारण की व्यवस्था नहीं
प्याज ही एक ऐसी कृषि उपज है जिसे हर जगह नहीं रखा जा सकता. इसके लिए न ज्यादा गर्मी और न ज्यादा ठंड अर्थात सामान्य तापमान जरूरी है जो पूर्णिया में संभव नहीं हो पाता है. यही वजह है कि इस मामले में व्यापारी कोई रिस्क नहीं लेते.
यहां उल्लेख्य है कि प्याज के मामले में पूर्णिया की मंडियां पूरी तरह से महाराष्ट्र के नासिक पर निर्भर हैं. वैसे मध्य प्रदेश, राज स्थान और पटना व बिहारशरीफ से भी यहां प्याज मंगाये जाते हैं. अगस्त के दूसरे सप्ताह से बैंग्लुरू का प्याज भी मंडियों में घुसने लगता है.
आसमान छूने लगे हैं हरी सब्जियों के दाम
हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं. फुटकर बाजार की बात करें तो बीते 15 दिनों में 25 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 40रुपये प्रतिकिलो पहुंच गया है. भिंडी को छोड़ अधिकांश हरी सब्जियों के दाम 40 के पार है. करेला का भाव 20 रुपये से सीधे 40 रुपये प्रतिकिलो हो गया है. आमतौर पर बैंगन की सब्जी से लोग नाक-भौं सिकुड़ते हैं पर बाजार में भाव पूछकर देखिये तब बैंगन का अकड़पन का पता चलेगा.
चठैल जहां 40 रुपये है वहीं गोभी 60 रुपये प्रतिकिलो है. इन हरी सब्जियों के बीच झिंगली बेचारी अकेले रसोई घर की शोभा बढ़ा रही है. कद्दू का भाव भी स्थिर है. सलाद से पहले प्याज हटा अब टमाटर,मूली और खीरा भी एक के बाद एक गायब हो रहे हैं. टमाटर के तेवर सातवें आसमान पर है.
टमाटर को देख मूली ने भी अपने भाव बढ़ा लिये. भला खीरा पीछे क्यों रहती. उसने भी अपना दाम उन दोनों के बराबर कर लिया. फुटकर दुकानों में सलाद के इन चारों व्यजंन के दाम 40 रुपये प्रतिकिलो है. सब्जी कारोबारी दिनेश महतो कहते हैं कि मौसम की मार से सब्जियों के दाम बढ़े हैं. मौसम के ठीक होते ही सब्जियों के दाम गिरने लगेंगे.
क्या है उम्मीदें
कारोबारियों का मानना है कि नया प्याज मंडियों में आने के बाद ही प्याज के भाव नीचे उतरने लगेंगे. अभी चूंकि आवक नगण्य है इसलिए फिलहाल भाव गिरने की कहीं से कोई उम्मीद नजर नहीं आती.
एक सप्ताह के अंदर प्याज के भाव में उछाल
एक माह तक लोगों को झेलनी पड़ेगी प्याज की महंगाई
थोक व खुदरा बाजार के भाव में 15 रुपये का अंतर
आम आदमी की थाली से अब गायब होने लगा है प्याज
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