मां-बाप की मूरत हैं गुरु, कलयुग में भगवान की सूरत हैं गुरु
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Sep 2019 7:27 AM
पूर्णिया : जब विश्वविद्यालय के लंबित सत्रों को लेकर विद्यार्थी आजिज हो गये और समय पर पढ़ाई व डिग्री पाने की ललक हुई, तब यहां के छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आये डॉ. गौरीकांत झा. उन्होंने विद्यार्थियों की भ्रांतियों को दूर किया और उन्हें दूरस्थ शिक्षा की ओर मोड़ दिया. जो लंबे काल […]
पूर्णिया : जब विश्वविद्यालय के लंबित सत्रों को लेकर विद्यार्थी आजिज हो गये और समय पर पढ़ाई व डिग्री पाने की ललक हुई, तब यहां के छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आये डॉ. गौरीकांत झा. उन्होंने विद्यार्थियों की भ्रांतियों को दूर किया और उन्हें दूरस्थ शिक्षा की ओर मोड़ दिया. जो लंबे काल तक पढ़ाई छोड़ने के बाद फिर पढ़ने को आतुर दिखे तो उन्हें भी दूरस्थ शिक्षा का मार्ग दिखाया. उनके इस कमाल की एकमात्र वजह है कि 35 साल से शिक्षक रहते हुए भी आज भी वे खुद को छात्र मानते हैं. खुद को पूर्ववर्ती छात्र बताकर हरेक छात्र को नतमस्तक कर देते हैं.
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