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मां-बाप की मूरत हैं गुरु, कलयुग में भगवान की सूरत हैं गुरु

Updated at : 05 Sep 2019 7:27 AM (IST)
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मां-बाप की मूरत हैं गुरु, कलयुग में भगवान की सूरत हैं गुरु

पूर्णिया : जब विश्वविद्यालय के लंबित सत्रों को लेकर विद्यार्थी आजिज हो गये और समय पर पढ़ाई व डिग्री पाने की ललक हुई, तब यहां के छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आये डॉ. गौरीकांत झा. उन्होंने विद्यार्थियों की भ्रांतियों को दूर किया और उन्हें दूरस्थ शिक्षा की ओर मोड़ दिया. जो लंबे काल […]

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पूर्णिया : जब विश्वविद्यालय के लंबित सत्रों को लेकर विद्यार्थी आजिज हो गये और समय पर पढ़ाई व डिग्री पाने की ललक हुई, तब यहां के छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आये डॉ. गौरीकांत झा. उन्होंने विद्यार्थियों की भ्रांतियों को दूर किया और उन्हें दूरस्थ शिक्षा की ओर मोड़ दिया. जो लंबे काल तक पढ़ाई छोड़ने के बाद फिर पढ़ने को आतुर दिखे तो उन्हें भी दूरस्थ शिक्षा का मार्ग दिखाया. उनके इस कमाल की एकमात्र वजह है कि 35 साल से शिक्षक रहते हुए भी आज भी वे खुद को छात्र मानते हैं. खुद को पूर्ववर्ती छात्र बताकर हरेक छात्र को नतमस्तक कर देते हैं.

अपने इन्हीं खासियतों की वजह से डॉ. गौरीकांत झा ने वर्ष 2015 से इग्नू के पूर्णिया कॉलेज अध्ययन केंद्र के समन्वयक की जवाबदेही लेने के बाद इसे खूब आगे बढ़ाया और आज पूर्णिया में दूरस्थ शिक्षा एक मुकाम हासिल कर चुकी है. पिछले चार साल में विद्यार्थियों की संख्या वर्ष 2015 की तुलना में तिगुनी से अधिक हो गयी है.
वर्तमान में यहां सर्टिफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री के 39 कोर्स चल रहे हैं. इस साल आधा दर्जन नये कोर्स स्वीकृत किये गये. उनके प्रयास से साइंस की प्रायोगिक कक्षा व परीक्षा भी शुरू करा दी गयी. यहीं कारण है कि आज जब पूर्णिया विवि की स्थापना से सत्र का नियमितीकरण हुआ है, तब भी दूरस्थ शिक्षा को लेकर होड़ मची है.
वह भी तब जब इग्नू आनेवाले विद्यार्थी के चालू सत्र के रहने पर उसे पूर्णिया विवि में नामांकन की सलाह वे खुद दे रहे हैं. फिलहाल, विश्वविद्यालय के डीन मानविकी के पद पर कार्यरत डॉ. गौरीकांत झा वैकल्पिक व्यवस्था होने तक इग्नू का कार्यभार संभाल रहे हैं. मगर उनकी कामना है कि पूर्णिया में इग्नू का सब रिजनल सेंटर खुले.
राष्ट्रीय सेवा योजना के जरिये गरीब छात्राओं में भरी हौसले की उड़ान
पूर्णिया : रंग-रोगन करनेवाली की बेटी ज्योति कुमारी कई मंच पर सम्मानित हो चुकी है. यह मुमकिन बनाया प्रोफेसर डॉ. गजाधर यादव ने. राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से गरीब परिवार की बेटियों को उन्होंने जिंदगी की रोशनी दिखायी. ज्योति की तरह नेहा, नंदिनी, पूजा, प्रियंका जैसी कई छात्राएं आज एनएसएस स्वयंसेवक के तौर पर दूसरे प्रदेशों में बिहार का प्रतिनिधित्व किया है.
पूर्णिया महिला महाविद्यालय से लेकर पूर्णिया विवि के एनएसएस पदाधिकारी के तौर पर डॉ. गजाधर यादव ने कई उल्लेखनीय कार्य किये हैं. सादगी से भरे डॉ. गजाधर यादव की खासियत है कि वे अपनी साइकिल से मलिन बस्तियों तक पहुंच जाते हैं और पूर्णिया को ज्योति जैसी प्रतिभाओं से रूबरू कराते हैं. उनके जुझारूपन का परिणाम है कि आज भी पूर्णिया महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना क्रियाशील है.
इसका सीधा फायदा बक्सा घाट के महादलित टोला बड़की मुशहरी को मिल रहा है जहां एनएसएस की छात्राएं नियमित तौर पर स्वच्छता के लिए जागरूक करने आती हैं. हाल में वन महोत्सव को भी सफल बनाने में डॉ. गजाधर यादव ने अहम भूमिका निभायी है. उनकी तत्परता का नतीजा है कि इस बार कॉलेजों में बड़े पैमाने पर पौधे लगाये गये हैं और पौधरोपण अभियान में पूर्णिया विवि ने मिसाल कायम की है.
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