विसंगतियों से लड़ने की ताकत देते हैं भगत सिंह के विचार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Mar 2019 6:33 AM
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पूर्णिया : हवाओं में रहेगी मेरे ख्यालों की बिजली, ये मुश्ते खाक है फानी, रहें ना रहें शहीदे आजम भगत सिंह के इन्हीं विचारों को पूर्णिया के साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने प्रगतिशील लेखक संघ पूर्णिया कार्यालय में साझा किया. अवसर था शहीदे आजम भगत सिंह के 89 वीं शहादत दिवस के आयोजन का. प्रगतिशील लेखक […]
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पूर्णिया : हवाओं में रहेगी मेरे ख्यालों की बिजली, ये मुश्ते खाक है फानी, रहें ना रहें शहीदे आजम भगत सिंह के इन्हीं विचारों को पूर्णिया के साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने प्रगतिशील लेखक संघ पूर्णिया कार्यालय में साझा किया.
अवसर था शहीदे आजम भगत सिंह के 89 वीं शहादत दिवस के आयोजन का. प्रगतिशील लेखक संघ पूर्णिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. देव नारायण पासवान देव ने किया और आगत अतिथियों का स्वागत प्र.ले.स के जिला सचिव नूतन आनन्द ने किया.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए बिहार प्र.ले.स के उपाध्यक्ष देव आनन्द ने कहा कि आज इस बात पर गौर करना आवश्यक है कि भगत सिंह को क्यों याद किया जाना चाहिए और भगत सिंह को कैसे याद किया जाना चाहिए?
भगत सिंह को हमें इसलिए याद करना चाहिए कि उनकी स्मृतियों से हमें प्रेरणा मिलती है और उनके विचारों से हमें वर्तमान की विसंगतियों के खिलाफ लड़ने की दिशा मिलती है हमें भगत सिंह की विरासत को जनता के बीच ले जाना होगा ताकि जनता की मुक्ति का सवाल हल किया जा सके.
कार्यक्रम का संचालन करते हुए नूतन आनन्द ने कहा आज जिस तरह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति की आजादी और प्रतिरोध का अधिकार छीनने की कोशिश जारी है, भगत सिंह की राजनैतिक-वैचारिक समझ हमें इसके खिलाफ एक मुकम्मल हथियार प्रदान करता है.
डा कमल किशोर चौधरी ने कहा भगत सिंह अपने समकालीन क्रांतिकारियों से इस मायने में भिन्न थे कि उन्हें क्रांति की स्पष्ट परिभाषा और भविष्य का हिन्दोस्तान कैसा हो, इसकी स्पष्ट समझ थी. युवा संस्कृतिकर्मी प्रांशु हर्षोत्पल ने कहा भगत सिंह में अद्भुत वैचारिक चेतना थी.
उन्होंने जेल को पुस्तकालय और प्रयोगशाला बना दिया था. भगत सिंह का कहना था क्रांति का इस सदी में सिर्फ एक ही मतलब हो सकता है जनता के लिए, जनता के द्वारा राजनीतिक सत्ता पर कब्जा. डा चन्द्रकांत भारती का कहना था जड़ता और निष्क्रियता को तोड़ने के लिए एक क्रांतिकारी स्पिरिट पैदा करने की जरूरत होती है.
इसे हम भगत सिंह के विचारों से जान सकते हैं. अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो देवनारायण पासवान देव ने कहा भगत सिंह के वैज्ञानिक विचारधारात्मक सिद्धांतों को पहचानना और तदनुरूप आज की व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ना वक्त की मांग है.
अन्य वक्ताओं में संजय सनातन, बाबा वैद्यनाथ झा, सोनाली चकवर्ती, प्रीति कुमारी, खुशबू रानी ने भी अपने विचार रखे. द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ इसमें वरिष्ठ कवियों के अलावा युवा कवियों की रचनाएं यादगार रही. प्रांशु हर्षोत्पल की कविता ‘ भगत सिंह एक आकाश है और सूरज की रोशनी उसकी आवाज’ और ‘नया महाभारत’सराहा गया.
संजय सनातन, दिनकर दीवाना, गंगेश पाठक, प्रो किशोर कुमार यादव, बाबा बैद्यनाथ, डा के के चौधरी, गोपाल चंद्र घोष, विद्यानन्द शास्त्री, चन्द्रकांत भारती, नूतन आनन्द एवं प्रो देवनारायण पासवान देव आदि ने समसामयिक कविताओं का पाठ किया.
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