मालखाना शिफ्टिंग में खोई जेवरात-नकदी की पोटली 2 महीने बाद मिली, जानकीनगर पुलिस ने पीड़ित व्यवसायी को सौंपी

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 19 May 2026 1:48 PM

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पीड़िता

पूर्णिया जिले की जानकीनगर थाना पुलिस ने मालखाने में दो महीने की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद आखिरकार जेवरात और नकदी से भरी वह पोटली ढूंढ निकाली, जो शिफ्टिंग के दौरान कहीं दब गई थी. कोर्ट से रिहाई आदेश मिलने के बाद पुलिस ने दो लाख रुपये मूल्य के जेवरात और ₹21,500 नकद पीड़ित किराना व्यवसायी को सुरक्षित सौंप दिए हैं.

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पूर्णिया के जानकीनगर से नितेश राय की रिपोर्ट:

थाना शिफ्ट होने के कारण मालखाने में लापता हो गई थी पोटली

यह अजीबोगरीब मामला जानकीनगर थाने से जुड़ा है. जानकीनगर के वर्तमान थानाध्यक्ष परिक्षित पासवान ने बताया कि पीड़ित किराना व्यवसायी ममता दुगड़ के चोरी हुए और पुलिस द्वारा बरामद किए गए जेवरात व नकद ₹21,500 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें वापस कर दिए गए हैं. दरअसल, कोर्ट ने बीती 13 मार्च को ही इन सामानों को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया था. परंतु इसी दौरान जानकीनगर थाना का मालखाना दूसरी जगह शिफ्ट हो रहा था, जिसके कारण जेवरात और नकदी की पोटली कहीं अंदर दब गई थी. इस वजह से पीड़ित व्यवसायी को अपनी ही संपत्ति के लिए दो महीने तक लंबा इंतजार करना पड़ा.

2024 में घर का ताला तोड़कर हुई थी ₹2 लाख के जेवरात की चोरी

मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो, नगर पंचायत जानकीनगर के वार्ड नंबर-09 की रहने वाली किराना व्यवसायी ममता दुगड़ (पति अजित दुगड़) के घर पर 19 सितंबर 2024 की रात को एक बड़ी चोरी हुई थी. नगर पंचायत जानकीनगर के ही वार्ड नंबर-05 निवासी सुमन सिंह नामक चोर ने घर का ताला तोड़कर संदूक में रखे दो लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और ₹21,500 नकद उड़ा लिए थे. घटना के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष संतोष कुमार झा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जानकीनगर थाना में कांड संख्या-343/2024 दर्ज किया था.

72 घंटे में पुलिस ने किया था बरामद, अब जाकर मिला माल

तैश में आई जानकीनगर पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर न सिर्फ मुख्य आरोपी सुमन सिंह को दबोच लिया था, बल्कि उसके पास से चोरी गए शत-प्रतिशत जेवरात और ₹21,500 नकद भी बरामद कर मालखाने में सुरक्षित जमा करा दिए थे. हालांकि, मालखाना शिफ्टिंग की तकनीकी गड़बड़ी के कारण कानूनी आदेश के बाद भी पीड़ित परिवार को सामान नहीं मिल पा रहा था. अब दो महीने बाद मालखाने के बक्से खंगालने पर जब पुलिस को यह पोटली सही-सलामत मिल गई, तो इसे आधिकारिक रूप से ममता दुगड़ को सौंप दिया गया, जिसके बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और पुलिस का आभार जताया है.

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