अंदर ही अंदर सुलग रही है पूर्णिया में हाइकोर्ट बेंच की मांग

पूर्णिया : विकास के इस दौर में हाई कोर्ट के बेंच की मांग अंदर ही अंदर सुलग रही है. इस मांग को लेकर पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस संजीदा है. वे कहते भी हैं कि पूर्णिया लगातार विकास की राह पर चल रहा है और बहुत कुछ हासिल भी हुआ है पर यह कसक अब तलक […]
पूर्णिया : विकास के इस दौर में हाई कोर्ट के बेंच की मांग अंदर ही अंदर सुलग रही है. इस मांग को लेकर पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस संजीदा है. वे कहते भी हैं कि पूर्णिया लगातार विकास की राह पर चल रहा है और बहुत कुछ हासिल भी हुआ है पर यह कसक अब तलक बनी रह गई है कि बारंबार मांग के बावजूद यहां हाई कोर्ट के बेंच की स्थापना अब तक नहीं हो सकी है. इतना ही नहीं, प्रबुद्ध जनमानस पूर्णिया को उपराजधानी का दर्जा दिए जाने की भी वकालत कर रहा है.
उनका कहना है कि उपराजधानी की मांग उस समय से हो रही है जब बिहार से कटकर झारखंड राज्य का गठन किया गया था. यह बात भी मुखर रुप से रखी गई कि हाई कोर्ट के बेंच की मांग आश्वासनों के बीच 27 सालों से झूल रही है. नब्बे के दशक में इस मांग को लेकर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर हुई थी. लोगों का तर्क यह था कि पूर्णिया पूर्ण अरण्य से बना है और यहां का इम्फ्रास्ट्रेक्चर इस तरह का है कि इसे उपराजधानी का दर्जा दिया जा सकता है. जीतन राम मांझी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हाई कोर्ट बेंच की मांग को न केवल जायज ठहराया था बल्कि यह आश्वासन भी दिया था कि अगर वे सीएम रह गए तो यह मांग पूरी हो जाएगी. उस समय वे पूर्णिया दौरे में आए थे और
बनमनखी में एक सभा को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे . इससे पहले पूर्णिया के प्रबुद्ध लोगों के एक शिष्टमंडल ने मुलाकात कर उनसे यह मांग की थी और इसके पक्ष में तर्क भी प्रस्तुत किया था. मगर उनके सीएम पद से हटते ही बात खत्म हो गई. यहां प्रस्तुत है वह भावनाएं जिस पर पूर्णिया का प्रबुद्ध मन आस लगाए बैठा है.
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