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जीएमसीएच में प्रतिदिन की जाती है कैंसर संभावित 100 मरीजों की जांच

स्वास्थ्य मूल्यांकन अभियान

गैर संचारी रोगों की पहचान को लेकर चल रहा है स्वास्थ्य मूल्यांकन अभियान पूर्णिया. राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के कैंसर वार्ड में प्रति दिन अमूमन एक सौ की संख्या में कैंसर के संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है. कैंसर विभाग के डॉ. गौरव कुमार ने बताया कि ज्यादातर लोगों में मुंह के कैंसर की संभावना पायी जाती है जबकि महिलाओं में सर्वाइकल, ब्रेस्ट आदि के भी संभावित कैंसर मरीज की स्क्रीनिंग के बाद जांच के लिए आगे भेजा जाता है. उन्होंने कहा कि गांव से भी कैंसर संभावित मरीज यहां पहुंच रहे हैं.वहीं कैंसर विभाग की डॉ. ऐश्वर्या राय ने बताया कि प्रत्येक महिला जिनकी उम्र अधिक है उन्हें कम से कम 5 वर्षों के अंतराल पर सर्विक्स की जांच कराते रहने की जरूरत है. बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए उनका समय पर टीकाकरण कराना जरुरी है ताकि उन्हें भविष्य में सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित किया जा सके. कहा जीएमसीएच में जांच और टीका बिलकुल निःशुल्क उपलब्ध है. समुदाय आधारित स्वास्थ्य मूल्यांकन अभियान स्वस्थ भारत के उद्देश्य को लेकर जिले में गैर संचारी रोगों से प्रभावित मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुदाय आधारित स्वास्थ्य मूल्यांकन अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत 30 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के सभी लोगों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का चेक लिस्ट तैयार किया जा रहा है. प्राप्त लक्षणों एवम जानकारियों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के लिए अग्रेत्तर जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी. इसके तहत उच्च रक्तचाप, डायबटीज एवं कैंसर आदि के संभावित मरीजों की खोज प्रखंडवार की जा रही है. गैर संचारी रोग मेडिकल पदाधिकारी डॉ. सुभाष कुमार ने बताया कि इसके अंतर्गत दो तरह के मोड में काम किया जा रहा है एक जो हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर खुद आ रहे हैं और दूसरा जो सेंटर पर नहीं आ रहे हैं उन्हें वार्ड के अनुसार कैम्प लगाकर उनकी स्क्रीनिंग की जानी है. जिनमें कैंसर के लक्षण संभावित होंगे उन्हें जीएमसीएच बुलाकर उनकी जांच की जायेगी और जरुरत पड़ने पर इलाज की व्यवस्था आयुष्मान कार्ड, मुख्यमंत्री योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा या ऑपरेशन के लिए बाहर भेजे जाने की भी व्यवस्था है. मरीजों को होंगे फायदे अमूमन गैर संचारी रोगों के बारे में लोगों को देर से जानकारी मिलने से कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है. कई मामलों में बीमारी इतनी जटिल अवस्था में पहुंच जाती है कि काफी कुछ करने के बाद भी मरीज का जीवन दांव पर लगा ही रहता है या फिर आजीवन कुछ न कुछ परेशानियां झेलनी पड़ती है. लेकिन स्क्रीनिंग के माध्यम से शुरू में ही इन बीमारियों का पता चल जाने से मरीजों का इलाज आसान और उनका जीवन सुरक्षित हो सकता है. बोले चिकित्सक कम्युनिटी बेस्ड डाटा तैयार करने के साथ साथ संबंधित मरीजों को इलाज भी उपलब्ध कराया जा रहा है. डायबटीज और हाइपरटेंशन के मामले में दवा दी जा रही है. लक्ष्य है हर किसी की जांच करके उनमें से पेशेंट को निकालना. निति आयोग के स्वास्थ्य मिशन के तहत हर व्यक्ति का डाटा रखना है. इस दायरे में आये मरीजों की मुफ्त जांच, मुफ्त दवा और मुफ्त फॉलोअप सारी व्यवस्था की गयी है. डॉ सुभाष कुमार, एमओ, गैर संचारी रोग विभाग

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Prabhat Khabar News Desk
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