पूर्णिया नगर निकाय चुनाव: लद गये पुरुषों की के दिन, नगर सरकार में 50 फीसदी सीटों पर काबिज होगी आधी आबादी

पूर्णिया नगर निकाय चुनाव के कुल 46 में से बाइस वार्डों को महिलाओं के लिए रिजर्व किया गया है. कुल 9 वार्डों पर पिछड़ा वर्ग का कब्जा रहेगा,अन्य वार्डों में भी चुनाव मैदान में महिला उतरेंगी.
पूर्णिया. पुरुषों की मनमानी के दिन अब लद गये. अब वे न तो महिलाओं को दरकिनार कर आगे बढ़ सकते हैं और न ही महिलाएं उनका पीछा छोड़ने वाली हैं. जी हां, पुरुषों की तमाम कोशिशों के बावजूद इस बार गठित होने वाली नगर सरकार में शहर के पचास फीसदी वार्डों की बागडोर इस बार आधी आबादी के जिम्मे होगी. हालांकि चुनाव आयोग ने निगम के कुल 46 में से बाइस वार्डों को महिलाओं के लिए रिजर्व कर दिया है पर इसके बावजूद कई अनारक्षित सीटों पर भी महिलाएं कब्जा करने की जुगत में हैं. इसके लिए वे पहले से चुनावी मैदान में नजर भी आ रही हैं. उधर नगर निगम के नौ वार्डों पर पिछड़ा वर्ग का कब्जा रहेगा. समझा जाता है कि इस चुनाव में महिलाओं की अधिक भागीदारी के कारण निगम का चुनाव काफी दिलचस्प हो जायेगा.
गौरतलब है कि इस बार नगर निगम के 22 वार्ड महिला के लिए आरक्षित किए गये हैं. महिला के लिए आरक्षित वार्ड तीन और चार पहले आरक्षण से मुक्त था. इसी तरह वार्ड नं 7 एवं 8 पहले अनुसूचित जनजाति के लिए था जो इस बार अनारक्षित महिला हो गया है. वार्ड नं 11 पहले पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित था जो अब सामान्य महिला हो गया है जबकि वार्ड नं 12 अनुसूचित जाति महिला के लिए रिजर्व था पर अब सामान्य हो गया है. वार्ड नं 24 अनुसूचित जाति अन्य से पिछड़ा वर्ग महिला, वार्ड नं 19 अनारक्षित अन्य से अनारक्षित महिला, वार्ड नं 20 पिछड़ा वर्ग अन्य से अनुसूचित जाति अन्य और वार्ड नं 22 एवं 23 अनारक्षित महिला से अनारक्षित अन्य के लिए रिजर्व है. अगर देखा जाए तो महिलाओं के लिए वार्ड तीन, चार, सात, 10, 11, 13, 15, 16, 19, 21, 24, 26, 29, 31, 33, 34, 37, 38, 41, 42, 43, 44 आरक्षित है.
यह तो रिजर्व सीट पर महिलाओं के आने की गारंटी हो गयी पर नगर निगम के 46 में कई सामान्य सीटें भी हैं जिन पर पुरुषों के अलावा महिलाएं भी चुनाव लड़ने की तैयारी पर हैं. बतौर उदाहरण मेयर की सीट सामान्य है जिस पर पुरुष और महिलाएं दोनों लड़ सकती हैं और इसके लिए कई महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर रही हैं. एससी-एसटी के लिए आरक्षित सात वार्डों में कम से कम दो महिलाओं के चुनाव लड़ने की संभावना है जबकि पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नौ वार्डों में भी महिलाएं पुरुषों से दो-दो हाथ करने का मन बना रही हैं. चुनाव के लिए अपनी तैयारी में जुटी कई महिलाओं ने कहा कि सरकार ने जब बराबरी का दर्जा दे दिया है तो वे अपने अधिकार के लिए पीछे क्यों रहें और वह भी तब जबकि उनकी क्षमता कहीं अधिक है.
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