फिजाओं में घुल रहा है जहर, बढ़ते प्रदूषण से घुट रहा दम, विशेषज्ञों ने चेताया, अब घुटने लगेगा दम

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पटना शहर का एक्यूआइ बीते तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है और शहर की हवा खराब होते जा रही है. बुधवार को शहर का एक्यूआइ 157 था जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं था. जबकि गुरुवार को बढ़ कर यह 171 और शुक्रवार को 265 हो गया, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से खराब श्रेणी में माना जाता है.

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बढ़ते प्रदूषण से शहर की हवा खराब होते जा रही है. इसका असर यहां के लोगों पर पड़ना शुरू हो गया है. इन दिनों जिले के अस्पतालों में पहुंचने वालों में 25 प्रतिशत मरीज सांस लेने में समस्या, सीने में दर्द, खांसी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. वहीं, बच्चों का भी खांसी से बुरा हाल है. ऐसे में डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जितना हो सके घर से बाहर निकलने को टालें, बहुत जरूरी होने पर मास्क का इस्तेमाल करें. पल्मोनरी विभाग के डॉक्टर ने बताया कि खासकर दो सप्ताह से इस तरह के मरीजों की संख्या ओपीडी में बढ़ गयी है. ऐसे मरीजों को 15 दिनों तक खांसी कम नहीं रही है.

आपके शहर में

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10 से 15 मरीज आ रहे प्रदूषण के

प्रदूषण के कारण एलर्जी से पीड़ित रोजना करीब 10 से 15 मरीज आइजीआइएमएस के इएनटी विभाग में पहुंच रहे हैं. बीते एक सप्ताह से यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है. डॉक्टरों ने इसे एलर्जिक रायनायटिस नाम दिया है. आम बोल चाल की भाषा में इसे नाक की एलर्जी बोला जाता है.

गले में खरास व नाक में एलर्जी के अधिक मरीज

इएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि क्रोनिक डिसएबिलिटी (लगातार अपंगता) करने वाली प्रथम 10 बीमारियों में एलर्जिक रायनायटिस का भी स्थान है. इस तरह से एलर्जिक रायनायटिस हमारे रोजमर्रा के जीवन में परेशानी का सबब बनती जा रही है. शहर में बढ़ते प्रदूषण व इससे बचाव नहीं करने वाले मरीज इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. इसके अलावा प्रदूषण के कारण गले में खरास व सांस लेने की परेशानी के भी मरीज विभाग में पहुंच रहे हैं.

इसलिए हो रही बीमारी

– कल कारखानों का धुआं, सड़क की धुल व मिट्टी का घर में आना, या उसकी चपेट में आना

– अशुद्ध पानी पीना

– वाहन का धुआं हवा में घुल सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करना

– अशुद्ध हवा

– ध्वनि प्रदूषण

– शांत वातावरण का नहीं होना,

बीमारी से बचाव

अगर आपके यहां पालतू जानवर हैं तो उसे बेडरूम से बाहर ही रखें. अपने घर के पर्दे, चादरें, कालीन और खिलौनों को हमेशा धोकर साफ रखें. अगर हो सके तो अपने तकिए और गद्दे के कवर को नियमित रूप से गरम पानी में धोएं एवं साफ रखें. झाड़ू लगाने से अच्छा होगा कि वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें. फर्नीचर और फ्लोर गीले कपड़े से साफ करें, अगर आपके घर की दीवारों पर फंगस (फफूंद) या काई जमी है तो उसे ब्लीच के इ्स्तेमाल से साफ रखें. धूम्रपान न करें और न ही दूसरों को अपने घर में करने दें.

डॉक्टर्स की सलाह: खुद डॉक्टर न बनें

पीएमसीएच के दमा एवं सांस रोग विशेषज्ञ डॉ सुभाष चंद्र झा ने बताया कि एक्यूआइ लेवल करीब 400 पहुंच गया है. ऐसे में पुराने दिल व सांस रोगियों के लिए खतरे की घंटी है. अस्पतालों में लोग खांसी, सांस फूलने, गले में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. बहुत से लोग ऐसे हैं जो डॉक्टर के पास नहीं जा रहे, उन्होंने इनहेलर लेकर रख लिए हैं. लोगोंं को खुद से डॉक्टर नहीं बनना चाहिए, वरना परेशानी हो सकती है.

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