Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष के दौरान क्या करें और क्या न करें को लेकर है कन्फ्यूजन, तो ये पढ़ करें दूर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Sep 2022 5:02 AM
पितृ पक्ष पितरों का महोत्सव है. तर्पण ऋषियों का नैत्यिक व शुभ कार्य था. ज्योतिर्विद पं राजेश्वरी मिश्र इस काल को पितरों की आराधना का पुण्य काल बताते हैं. इस काल में भू-भवन, धन-संपत्ति आदि की खरीद की जाये तो पितरों को प्रसन्नता ही होती है.
गोपालगंज. आश्विन कृष्ण पक्ष देव तुल्य पितरों के नाम है. इसमें अपने वंशजों के आवाहन पर देव-पितर धरा पर आते हैं. श्राद्ध-तर्पण से संतुष्ट हो सुख-समृद्धि के आशीषों की वर्षा करते हुए हुए अपने धाम को जाते हैं. पितरों को देव कोटि का माना गया है. शादी -विवाह हो या अन्य मंगल कार्य पितरों को सबसे पहले आमंत्रित किया जाता है. गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान शिव को पितर कहा है. पितृ पक्ष पितरों का महोत्सव है. उन्हें स्मरण करने और श्रद्धापूर्वक श्राद्ध व तर्पण करने का काल है. तर्पण ऋषियों का नैत्यिक व शुभ कार्य था. ज्योतिर्विद पं राजेश्वरी मिश्र इस काल को पितरों की आराधना का पुण्य काल बताते हैं. इस काल में भू-भवन, धन-संपत्ति आदि की खरीद की जाये तो पितरों को प्रसन्नता ही होती है. रही बात पितरों के श्रद्धा काल में शुभ-अशुभ का हवाला देते हुए खरीद-बिक्री के निषेध की तो ऐसे कोई भी प्रसंग शास्त्रों में नहीं आते हैं.
प्रतिपदा- 11 सितंबर. द्वितीया और तृतीया- 12 सितंबर. चतुर्थी- 13 सितंबर. पंचमी- 14 सितंबर. षष्ठी- 15 सितंबर. सप्तमी- 17 सितंबर. अष्टमी- 18 सितंबर. नवमी- 19 सितंबर. दशमी- 20 सितंबर. एकादशी- 21 सितंबर. द्वादशी- 22 सितंबर. त्रयोदशी- 23 सितंबर. चतुर्दशी- 24 सितंबर. अमावस्या- 25 सितंबर.
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-शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.
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-श्राद्ध कर्म के दौरान आप जनेऊ पहनते हैं, तो पिंडदान के दौरान उसे बाएं की जगह दाएं कंधे पर रखें.
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-श्राद्ध कर्मकांड करने वाले व्यक्ति को अपने नाखून नहीं काटने चाहिए.
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-दाढ़ी या बाल भी नहीं कटवाने चाहिए.
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– दरवाजे पर आने वाले किसी भी प्राणी को भोजन दिया जाना चाहिए और आदर सत्कार करना चाहिए.
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-पितृ पक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करना चाहिए.
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पितृ पक्ष में कुछ चीजों को खाना मना है
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-जैसे- चना, दाल, जीरा, काला नमक, लौकी और खीरा, सरसों का साग आदि नहीं खाना चाहिए.
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– मांसाहारी भोजन, मदिरा, तंबाकू का सेवन बिलकुल न करें.
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-अनुष्ठान के लिए लोहे के बर्तन का उपयोग न करें.
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-किसी भी पवित्र स्थान पर तर्पण और पिंड दान कर सकते हैं.
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-श्राद्ध कर्म के लिए काले तिल का उपयोग करना चाहिए. पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें.
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-श्राद्ध कर्म शाम, रात, सुबह या अंधेरे के दौरान नहीं किया जाना चाहिए.
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-पितृ पक्ष में, गायों, कुत्तों, चींटियों और ब्राह्मणों को यथा संभव भोजन कराना चाहिए.
पद्मपुराण के अनुसार भगवान राम ने पुष्कर में भी अपने पिता का श्राद्ध किया था और ब्राह्मणों को भोजन कराया था. उस दौरान माता सीता ने महाराज दशरथ के साथ दो अन्य लोगों को भी भोजन कर रहे ब्राह्मणों के शरीर से सटकर बैठे हुए देखा था. पितृपक्ष में यह परंपरा आज तक चली आ रही है. इस पक्ष में पितर आते हैं और हमारे द्वारा किये गये श्राद्ध-तर्पण से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
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