मुजफ्फरपुर में निगम क्षेत्र से महंगे दाम पर लोग खरीद रहे हैं पंचायत की जमीन, जानें क्या है वजह

Updated at : 22 Jun 2022 4:22 PM (IST)
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मुजफ्फरपुर में निगम क्षेत्र से महंगे दाम पर लोग खरीद रहे हैं पंचायत की जमीन, जानें क्या है वजह

मुजफ्फरपुर नगर निगम से सटे ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाले गोबरसही, भगवानपुर, अहियापुर के शेखपुर, गणेशपुर एवं बूढ़ी गंडक नदी से सटे दक्षिण नाजीपुर इलाके की जमीन सबसे महंगी है. निबंधन विभाग से तय सरकारी रेट इन पांचों मौजा (राजस्व ग्राम) में पड़ने वाली जमीन की कीमत 30-50 लाख रुपये प्रति कट्ठा है.

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मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर नगर निगम से सटे ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाले गोबरसही, भगवानपुर, अहियापुर के शेखपुर, गणेशपुर एवं बूढ़ी गंडक नदी से सटे दक्षिण नाजीपुर इलाके की जमीन सबसे महंगी है. निबंधन विभाग से तय सरकारी रेट इन पांचों मौजा (राजस्व ग्राम) में पड़ने वाली जमीन की कीमत 30-50 लाख रुपये प्रति कट्ठा है. यानी, 07-10 लाख रुपये प्रति डिसमिल सरकारी दरें तय है. हालांकि, वर्तमान बाजार भाव की तुलना में जमीन की सरकारी दर काफी कम है. जिस तरीके से शहर के कल्याणी-मोतीझील, इमलीचट्टी, कलमबाग चौक आदि इलाके की जमीन की बाजार भाव बताना मुश्किल है.

सरकारी रेट आखिरी बार 2013 में बढ़ा था

ठीक उसी प्रकार शहर से सटे इन ग्रामीण इलाके की जमीन की रेट का अनुमान लगाना अभी के समय में मुश्किल हो गया है. रजिस्ट्री ऑफिस भले ही शहर से बाहर का क्षेत्र होने के कारण जमीन की श्रेणी को चार भागों में बांट व्यावसायिक, आवासीय, विकासशील व दो फसला कर दिया है. लेकिन, इन इलाके में अभी जितनी भी जमीन की रजिस्ट्री होती है. वह आवासीय श्रेणी से कम नहीं है. तय सरकारी रेट से कई गुना ज्यादा रेट पर रजिस्ट्री होती है. बता दें कि इन इलाके की जमीन का सरकारी रेट आखिरी बार 2013 में बढ़ा था. नौ साल पहले जिस रेट पर रजिस्ट्री होती थी, आज भी उसी रेट पर रजिस्ट्री होती है.

शहर से सटे इलाके की जमीन रजिस्ट्री में होती है राजस्व की हेराफेरी

निबंधन विभाग ने राजस्व वृद्धि के ख्याल से आखिरी बार शहर से सटे इलाके यानी निगम सीमा से सटे आठ किलोमीटर पेरिफेरल क्षेत्र में जमीन की सर्किल रेट को नाै साल पहले 2013 में बढ़ाया था. तब व्यावसायिक, आवासीय, दो व एक फसला के साथ विकासशील का एक नया श्रेणी तय किया गया था. विकासशील को तीसरे नंबर पर रखा गया था. सड़क से सटे कृषि योग्य जमीन को राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से विकासशील की श्रेणी में रजिस्ट्री होती है. हालांकि, अभी जमीन रजिस्ट्री के दौरान राजस्व का अगर सबसे ज्यादा हेराफेरी होता है, तो वह शहर से सटे आठ किलोमीटर के पेरिफेरल का ही एरिया है.

शहर की सीमा से सटे पेरिफेरल एरिया में पड़ता है 166 राजस्व ग्राम

शहरी सीमा से सटे आठ किलोमीटर की पेरिफेरल एरिया में कुल 166 मौजा (राजस्व ग्राम) पड़ता है. इसमें सबसे ज्यादा मुशहरी प्रखंड के 120 मौजा है. दूसरे नंबर पर बोचहां अंचल का 22 मौजा है. तीसरे नंबर पर कुढ़नी के 16 व चौथे नंबर पर मीनापुर प्रखंड के आठ मौजा है. मुशहरी अंचल के मौजा गन्नीपुर, भगवानपुर, गोबरसही, अहियापुर, रकबे अहियापुर (गणेशपुर), शेखपुर व बूढ़ी गंडक नदी से सटे दक्षिण भाग के नाजीरपुर में 07-10 लाख रुपये प्रति डिसमिल जमीन की सरकारी दरें तय है, जो अन्य मौजा की तुलना में सबसे ज्यादा है. वहीं, कुढ़नी प्रखंड के माधोपुर सुस्ता व मधौल की जमीन सबसे ज्यादा है. बोचहां के गरहां, पटियासा, झपहां एवं मीनापुर अंचल के पुरैना व पखनाहा शिउराम की जमीन सबसे महंगी ब्रिकी हो रही है.

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