वीमेन ऑफ द वीक : राग-संगीत तो मेरे जींस में है, जो मेरी रगों में भी दौडता है, बोलीं सरोद वादिका डॉ रीता
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 06 Apr 2025 4:25 AM
सरोद वादिका डॉ रीता
कंकड़बाग की रहने वाली डॉ रीता दास पिछले 33 वर्षों से सरोद वादन कर रही हैं. वह बिहार की पहली सरोद वादिका हैं और वर्तमान में जेडी वीमेंस कॉलेज में संगीत विभाग की अध्यक्ष हैं, साथ ही पीपीयू से भी जुड़ी हुई हैं.
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में महिलाओं को अक्सर केवल गायन से जोड़ा जाता रहा है, जबकि वाद्य संगीत को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था. आज भी कई वाद्य यंत्रों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है, और इनमें से एक है सरोद. यह एक महंगा और वजनी वाद्य यंत्र है, जिसे महिलाएं कम ही बजाती हैं. उन्होंने अपने संगीत सफर, चुनौतियों और सफलताओं से जुड़ी बातें प्रभात खबर से साझा कीं. पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश.
Q. सरोद वादन से आपका कैसे जुड़ाव हुआ, आप इससे कैसे जुड़ीं? अपने बारे में भी कुछ बताएं ?
मैं मूल रूप से मिथिला की रहने वाली हूं, लेकिन मेरा जन्म पटना में हुआ. मेरे पिता, प्रोफेसर सीएल दास, अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और उन्हें संगीत से गहरी प्रेम था. घर में अक्सर बड़े-बड़े कलाकारों का आना-जाना होता था. बचपन से ही मैंने पिता और उस्ताद बहादुर खान साहब का सरोद सुना और यह संगीत मेरे मन और मस्तिष्क में बैठ गया. जब मैंने सरोद सीखने की इच्छा जतायी, तो मेरे पिता ने वायलिन और सितार सीखने की सलाह दी, क्योंकि सरोद एक पुरुष प्रधान और वजनी वाद्य यंत्र है, और यह महंगा भी है. हालांकि, मैं जिद पर अड़ गयी और फिर सरोद वादन सीखने की शुरुआत की.राग-संगीत तो मेरे जींस में है, जो अब मेरी रगों में भी दौडता है.

Q. अपनी शिक्षा और पहली प्रस्तुति के बारे में बताएं?
मेरी शिक्षा पटना में हुई. मैंने पीयू से सोशियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. इसके बाद, इंदिरा कला संगीत विवि खेरागढ़ से एमए और डीयू से ‘प्रकृति ऑफ फाइन आर्ट एंड म्यूजिक’ में एमफिल और पीएचडी की. मेरी पहली प्रस्तुति खेरागढ़ में पढ़ाई के दौरान हुई. एक बार घर पर छुट्टियों में पिताजी ने दो दिवसीय वाद्य यंत्र पर आधारित कार्यक्रम रखा, जिसमें 1993 में मेरी पहली प्रस्तुति हुई. इस प्रस्तुति को बहुत सराहा गया. इसके बाद, मैंने बिहार के विभिन्न महोत्सवों, कई राज्यों और नेपाल में भी अपनी प्रस्तुति दी है.
Q. सरोद वादन में आने के लिए किसने प्रेरित किया?
मेरे परिवार के अलावा, मैं दो लोगों को अपनी प्रेरणा मानती हूं. पहली विदुषी अन्नरूर्णा और दूसरी पंडित भीम सेन जोशी. इन दोनों ने मुझे संगीत और सरोद वादन में प्रेरित किया.
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Q. सरोद सीखने के दौरान महिला होने के नाते आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
मेरी दीदी, डॉ रमा दास, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर थीं. जब वहां सरोद वादन की पढ़ाई के लिए आवेदन मांगे गये, तो मैंने भी आवेदन किया. उस समय विवि के वीसी पंडित विमलेंदु मुखर्जी ने मुझसे कहा कि महिलाएं अक्सर संगीत में शुरुआत करती हैं, लेकिन घर और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उनका संगीत की ओर ध्यान कम हो जाता है. मैंने उनसे आग्रह किया कि मुझे एक मौका दें, और मैं उन्हें शिकायत का मौका नहीं दूंगी. इसके बाद, पिताजी ने एक पत्र लिखा और मेरी तालिम शुरू हुई. महिलाओं को घर और सरकार, दोनों का सहयोग चाहिए, ताकि वे वाद्य यंत्र सीखने और संगीत में अपनी पहचान बना सकें.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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