Patna News : आइजीआइएमएस में डाॅक्टर व छात्रों के लिए इमरजेंसी आइसीयू में दो बेड रहेंगे रिजर्व

Published by : SANJAY KUMAR SING Updated At : 12 Apr 2025 1:38 AM

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आइजीआइएमएस में छात्र की मौत को लेकर हुए हंगामे के बाद संस्थान प्रशासन ने अपने डॉक्टरों, छात्रों व स्टाफ के लिए इमरजेंसी में आइसीयू के दो बेड रिजर्व रखने की घोषणा की. इसके साथ ही शुक्रवार को ओपीडी व इमरजेंसी में सुचारु रूप से इलाज हुआ.

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संवाददाता, पटना : आइजीआइएमएस में साथी की मौत के बाद प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत मिली है. संस्थान प्रशासन ने शुक्रवार को संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट के लिए इमरजेंसी में आइसीयू के दो बेड आरक्षित करने की घोषणा की. इसके साथ ही शुक्रवार को ओपीडी व इमरजेंसी में सुचारु रूप से इलाज हुआ. निदेशक प्रो बिंदे कुमार ने इसकी पुष्टि की है. वहीं, सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने मामले का संज्ञान लिया था और छात्रों व संस्थानकर्मियों को इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत इलाज सुनिश्चित कराने के लिए इमरजेंसी में बेड आरक्षित करने की मांग का समर्थन किया था. इसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया. आइजीआइएमएस के प्रभारी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ समरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इमरजेंसी के एबी वार्ड में फैकल्टी, मेडिकल छात्रों, सीनियर-जूनियर रेजिडेंट व स्टाफ के लिए बेड रिजर्व किये गये हैं. ये बेड वेंटिलेटर, माॅनिटर समेत सभी आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होंगे. इस विशेष व्यवस्था से ड्यूटी या किसी अन्य परिस्थिति में यदि कोई डाक्टर या मेडिकल छात्र अस्वस्थ होता है तो उसे तत्काल भर्ती कर समुचित उपचार किया जा सकेगा.

फैकल्टी डाॅक्टर्स बोले-पहले ही दिन मिल गया था छात्र अभिनव को बेड

आइजीआइएमएस के फैकल्टी डाक्टर्स एसोसिएशन ने 2023 बैच के एमबीबीएस छात्र अभिनव पांडेय की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे पूरे चिकित्सा व शैक्षणिक समुदाय की क्षति बताया. एफडीए के अध्यक्ष डाॅ राजीव रंजन सिन्हा व सचिव डाॅ भीम राम ने कहा कि घायल छात्र को अस्पताल में बेड नहीं मिलने की बात गलत है. दुर्घटना के तुरंत बाद उसे आइजीआइएमएस इमरजेंसी लाया गया था, जहां उसे तुरंत बेड उपलब्ध कराया गया था. लेकिन, छात्र के परिजन बेहतर इलाज के लिए अपनी मर्जी से पारस एचएमआरआइ ले गये थे. सभी चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका. ऐसे पीड़ादायक समय में बेड नहीं मिलने की भ्रामक खबर छात्रों को उकसाने के लिए फैलायी जा रही है.

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