पटना: 25 करोड़ के साइबर फ्रॉड की रकम मंगाने वाले गिरोह के तीन गिरफ्तार, दूसरे राज्यों में भी जुड़े तार

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साइबर अपराध का ग्राफिक्स

बिहार पुलिस ने 25 करोड़ रुपये के एक बड़े साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरोह करंट अकाउंट खोलकर ठगी की रकम मंगाता था और हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन लेता था. पुलिस मास्टरमाइंड और अन्य राज्यों में जुड़े तारों की तलाश कर रही है.

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पटना से आनंद सिंह कौशिक की रिपोर्ट

Cyber ​​Fraud : करंट अकाउंट खुलवाकर उसमें साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को बिहार साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई और पटना साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में इन खातों में करीब 25 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड की रकम का ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिली है. गिरफ्तार आरोपितों में कंकड़बाग निवासी प्रभाकर कुमार, राजीव नगर निवासी अमित कुमार और जमुई निवासी दीपक कुमार रावत शामिल हैं.

प्रभाकर और अमित रैपिडो चालक हैं और आपस में संपर्क में रहते थे. इसी दौरान दोनों की मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिसने बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन देने की बात कही थी. इसके बाद दोनों इस नेटवर्क से जुड़ गये.

पूछताछ में खुला खातों का राज

पटना साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी संगीता कुमारी ने बताया कि सूचना के आधार पर प्रभाकर कुमार को गांधी मैदान इलाके से गिरफ्तार किया गया. उसकी निशानदेही पर राजीव नगर से अमित कुमार को पकड़ा गया. दोनों से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर जमुई निवासी दीपक कुमार रावत को बक्सर स्थित उसके ससुराल से गिरफ्तार किया गया.

महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे चार-पांच अन्य लोगों के संपर्क में थे. इनके माध्यम से करंट अकाउंट खुलवाये जाते थे और इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मंगायी जाती थी. प्रत्येक ट्रांजेक्शन के एवज में तीन से चार हजार रुपये कमीशन मिलता था. महीने में करीब 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन मिलने की बात सामने आयी है.

जांच में अब तक पता चला है कि आरोपितों ने चार-पांच करंट अकाउंट खुलवाकर उपलब्ध कराये थे. इन खातों में करीब 25 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड की रकम का ट्रांजेक्शन हुआ है. पुलिस अब खातों में हुए लेन-देन और रकम के स्रोत की जांच कर रही है.

छोटे कमरे को ऑफिस बताकर खुलवाते थे खाते

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य छोटा-सा कमरा किराये पर लेते थे. इसके बाद उसे कार्यालय और व्यवसाय का ठिकाना बताकर करंट अकाउंट खुलवाया जाता था. इन खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम मंगायी जाती थी.

अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी

गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में एक अन्य व्यक्ति का नाम भी बताया है. पुलिस उसकी भूमिका का सत्यापन कर रही है. डीएसपी संगीता कुमारी ने बताया कि पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कोई और है. उसकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. पुलिस को आशंका है कि गिरोह के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं.


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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव कुमार तीन वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय है. फिलहाल हिंदी डिजिटल मीडिया में कंटेंट राइटर के रूप में अपना योगदान दिए हैं. बिहार के स्थानीय-क्षेत्रिय मुद्दों पर विशेष नजर बनाए रखते है. राजीतिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी खबरो पर पकड़ है. खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं.

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राजीव कुमार खास तौर पर राजनीति की खबर,ब्रेकिंग न्यूज, रियल टाइम खबरें और मौसम की खबर समेत रिसर्च आधारित खबरें करते हैं. इसके अलावा वह हर तरह के इवेंट का पल-पल का लाइव कवरेज भी करते हैं. सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर नजर बनाएं रखते है. खासकर राजनीति से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस रखते है. बिहार की राजनीति पर हमेशा नजर रहती है.

पत्रकारिता अनुभव

राजीव कुमार ने पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता की शुरुआती ज्ञान लिया, यहां हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज,खबर की थीम, खबरों में तथ्य आदि के बारे में बारीकी से समझा. जिले से जुड़ी खबर, लोकल खबर समेत कई खबरों की जानकारी मिली.

शिक्षा/पुरस्कार

मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण के बाबा सोमेश्वरनाथ नगरी रहने वाले राजीव कुमार ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में पारास्नातक की डिग्री हासिल किया. काम करने के दौरान बेतहर हेडिंग और एनओडी पैकेज पर दो-दो पुरस्कार प्राप्त है.

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