बिहार के इस स्टेशन पर 3 घंटे खड़ी रही डेमू ट्रेन, लोको पायलट ने ड्यूटी पूरी होने पर चलाने से किया इनकार

प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन
Bihar Train News: किशनगंज के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर बुधवार को अजीब स्थिति बन गई, जब मालदा-सिलीगुड़ी डेमू ट्रेन करीब तीन घंटे तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही. ट्रेन के लोको पायलट ने 9 घंटे की ड्यूटी पूरी होने का हवाला देते हुए आगे ट्रेन चलाने से इनकार कर दिया.
Bihar Train News: बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक अनोखी स्थिति देखने को मिली. मालदा से सिलीगुड़ी जा रही डेमू ट्रेन अचानक करीब तीन घंटे तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही. वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि ट्रेन के लोको पायलट का अपनी ड्यूटी पूरी होने के बाद आगे ट्रेन चलाने से इनकार करना था.
इस घटना के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और स्टेशन पर लंबे समय तक अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही.
दोपहर 2:52 बजे स्टेशन पहुंची ट्रेन
जानकारी के अनुसार मालदा से सिलीगुड़ी जा रही डेमू ट्रेन (संख्या 75719) बुधवार दोपहर करीब 2:52 बजे ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पहुंची. ट्रेन के रुकते ही लोको पायलट ने स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि उसकी निर्धारित ड्यूटी पूरी हो चुकी है. इसके बाद उसने ट्रेन को आगे ले जाने से साफ इनकार कर दिया.
9 घंटे की ड्यूटी पूरी होने का दिया हवाला
लोको पायलट ने रेलवे के सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वह लगातार 9 घंटे की ड्यूटी कर चुका है. ऐसे में आगे ट्रेन चलाना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं होगा.
रेलवे के नियमों के अनुसार लोको पायलट को लगातार 9 से 10 घंटे की ड्यूटी के बाद अनिवार्य रूप से विश्राम दिया जाना जरूरी है. यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि थकान की वजह से किसी तरह की दुर्घटना की आशंका कम हो सके.
घंटों इंतजार करते रहे यात्री
ट्रेन के अचानक रुक जाने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी. दोपहर से लेकर शाम तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही. इस दौरान सिलीगुड़ी और किशनगंज की ओर जाने वाले कई यात्री ट्रेन में फंसे रहे. ट्रेन में व्यापारी, दैनिक मजदूर और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवार भी सवार थे.
यात्रियों में दिखी नाराजगी
कई घंटों तक ट्रेन के नहीं चलने से यात्रियों का धैर्य जवाब देने लगा. स्टेशन पर मौजूद लोगों ने रेल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. कुछ यात्रियों का कहना था कि उन्हें आगे दूसरी ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन इस देरी की वजह से उनकी ट्रेन छूट गई.
सुरक्षा नियमों और यात्रियों की परेशानी के बीच फंसा मामला
यह पूरा मामला रेलवे के सुरक्षा नियमों और यात्रियों की परेशानी के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया. एक तरफ लोको पायलट ने नियमों का पालन किया, तो दूसरी तरफ यात्रियों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ा. हालांकि बाद में वैकल्पिक व्यवस्था कर ट्रेन को आगे रवाना करने की प्रक्रिया शुरू की गई. लेकिन तब तक कई यात्रियों को काफी असुविधा झेलनी पड़ चुकी थी.
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By Abhinandan Pandey
भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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